

स्थान :देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट


देहरादून प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने की अपील के बाद अब इसका असर सर्राफा कारोबार पर दिखाई देने लगा है। व्यापारियों में बढ़ती चिंता के बीच देहरादून के सर्राफा कारोबारी सड़क पर उतर आए हैं और सरकार से इस मुद्दे पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।


बीती देर शाम सर्राफा मंडल देहरादून ने धामावाला बाजार में मोमबत्ती जलाकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान व्यापारियों ने सरकार से व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित समाधान निकालने की अपील की।


सर्राफा मंडल देहरादून के अध्यक्ष सुनील मैंसोन ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का सीधा असर बाजार पर पड़ने लगा है। उन्होंने बताया कि ग्राहक सोने की खरीदारी को टाल रहे हैं, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि लोग वास्तव में एक साल तक सोना खरीदना बंद कर देते हैं तो छोटे और मध्यम स्तर के सर्राफा व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। व्यापारियों की रोजी-रोटी और कर्मचारियों के वेतन पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा।

सुनील मैंसोन ने यह भी कहा कि सरकार को इस तरह की सार्वजनिक अपील करने से पहले संबंधित हितधारकों और व्यापारिक संगठनों से बातचीत करनी चाहिए थी। इससे कोई ऐसा रास्ता निकाला जा सकता था जिससे सरकार का उद्देश्य भी पूरा होता और कारोबार पर भी प्रतिकूल असर नहीं पड़ता।


व्यापारियों का कहना है कि सर्राफा कारोबार केवल व्यापार नहीं बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका का माध्यम है। शादी-विवाह और पारंपरिक आयोजनों में सोने की खरीद भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा रही है।


प्रधानमंत्री की अपील को लेकर देशभर में राजनीतिक और आर्थिक बहस भी तेज हो गई है। सरकार का तर्क है कि सोने के आयात पर नियंत्रण से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सकता है।
फिलहाल सर्राफा व्यापारी सरकार से संवाद की उम्मीद लगाए हुए हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

