अमेरिका-ईरान 2026 युद्ध: F-15E क्रू मेंबर की हाई-रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन की पूरी कहानी

अमेरिका-ईरान 2026 युद्ध: F-15E क्रू मेंबर की हाई-रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन की पूरी कहानी

ईरान और अमेरिका के बीच 2026 की टकराव में अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान ने मार गिराया। विमान में दो क्रू थे – पायलट और वेपन्स सिस्टम ऑफिसर (WSO)। दोनों पैराशूट की मदद से सुरक्षित उतरे, लेकिन वे अलग-अलग स्थानों पर पहुंचे। WSO घायल हो गया और 24 घंटे से अधिक समय तक पहाड़ी दरार में छिपकर बचा रहा।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि घायल अधिकारी ने अमेरिकी फोर्स से संपर्क करने के लिए तीन शब्दों का SOS संदेश भेजा – “God is good।” शुरुआत में अमेरिकी अधिकारियों को संदेह हुआ कि यह ईरानी जाल हो सकता है। रेडियो पर सुनाई देने वाला संदेश कुछ “Power be to God” जैसा लगा, जिससे लगा कि यह कोई स्थानीय मुस्लिम बोल रहा है। बाद में पता चला कि अधिकारी बहुत धार्मिक हैं, इसलिए उन्होंने यह संदेश भेजा।

घायल WSO ने SERE (Survival, Evasion, Resistance, Escape) ट्रेनिंग का उपयोग करते हुए पहाड़ी इलाके में खुद को सुरक्षित रखा। उसने बीकन का बहुत कम इस्तेमाल किया और सुरक्षित एन्क्रिप्टेड डिवाइस से अमेरिकी फोर्स को जानकारी दी। अमेरिकी सर्विलांस टेक्नोलॉजी ने आखिरकार उसकी सटीक लोकेशन ट्रैक कर ली।

बचाव मिशन उच्च जोखिम वाला था। 200 सैनिकों वाली स्पेशल फोर्स ने रात में ऑपरेशन चलाया। राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि इजरायली खुफिया एजेंसी ने भी सीमित मदद दी और ईरानी सैनिकों की मूवमेंट की जानकारी प्रदान की। इसके अलावा, इजरायली एयर फोर्स ने रेस्क्यू जोन की ओर बढ़ रहे ईरानी फोर्स पर हमला करके उन्हें धीमा किया।

F-15E क्रू के लिए दो अलग-अलग बचाव अभियान चलाए गए। पहला दिन में पायलट के लिए था और दूसरा रात में WSO के लिए, जो अधिक चुनौतीपूर्ण था क्योंकि अधिकारी घायल था और चारों तरफ ईरानी फोर्स मौजूद थी। दोनों ऑपरेशनों में अमेरिकी फोर्स ने अस्थाई बेस स्थापित किया।

CIA ने ईरानी सेना को गुमराह करने के लिए डिसेप्शन मिशन चलाया और झूठी खबर फैलाई कि एयरमैन पहले ही ढूंढ लिया गया है। इससे ईरानी खोज टीम गलत दिशा में चली गई और असली WSO सुरक्षित रहा।

इस पूरी योजना में व्हाइट हाउस और पेंटागन का समन्वय भी अहम रहा। ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी और इजरायली साझेदारी ऑपरेशन की सफलता का प्रमुख कारण रही। इस हाई-प्रोफाइल रेस्क्यू ऑपरेशन ने अमेरिका के इजरायल के साथ गहरे सैन्य और खुफिया तालमेल को फिर से उजागर किया।