
स्थान : ऋषिकेश
ब्यूरो रिपोर्ट

ऋषिकेश के नेपाली फार्म में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मूर्ति लगाई जा रही थी, जिस पर उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। विरोध के दौरान कुछ कार्यकर्ता गैंती लेकर मूर्ति तोड़ने के लिए पहुंचे, जिससे मौके पर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई।


उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि राज्य की जमीन किसी की बपौती नहीं है। उनका आरोप है कि राज्य आंदोलन के शहीदों की याद में ही मूर्तियों का निर्माण होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक पार्टी के नेताओं की।


कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय को जनसंघ का नेता माना जाता है और इसीलिए उनकी मूर्ति की स्थापना पर वे विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि राज्य में स्थापित मूर्तियों का चयन स्थानीय संवेदनाओं के अनुसार होना चाहिए।


स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मौके पर स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए कार्रवाई की। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को शांत करने का प्रयास किया और सुरक्षा के मद्देनजर मूर्ति स्थापना स्थल पर विशेष निगरानी रखी।
इस घटना ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे विवाद न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित करते हैं बल्कि सामाजिक सौहार्द पर भी असर डालते हैं।

स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार ही मूर्ति स्थापना की जाएगी और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। वहीं, उत्तराखंड क्रांति दल ने भविष्य में भी इस तरह के विरोध जारी रखने की चेतावनी दी है।


