पहाड़ की पारंपरिक कला को जीवित रख रहे काष्टकार जसपाल रमोला

पहाड़ की पारंपरिक कला को जीवित रख रहे काष्टकार जसपाल रमोला

स्थान : पौड़ी
ब्यरो रिपोर्ट

पहाड़ की शांत वादियों में भी कई ऐसे हुनरमंद कलाकार हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी कला को जीवित रखे हुए हैं। ऐसे ही कलाकार हैं काष्टकार जसपाल रमोला, जिनका लकड़ी से आकृतियां बनाने का हुनर जिला मुख्यालय में आयोजित हैंडलूम एवं क्राफ्ट प्रदर्शनी में देखने को मिला।

प्रदर्शनी में जसपाल द्वारा बनाई गई बारीक और आकर्षक लकड़ी की आकृतियां लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही थीं। उनकी कला को देखकर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया भी प्रभावित हुईं और उन्होंने खुले दिल से उनकी सराहना की।

जसपाल रमोला बताते हैं कि उनका यह सफर तीन दशक पुराना है। वर्ष 1993 में उन्होंने पहली बार प्रदर्शनी में हिस्सा लिया था। बचपन से ही लकड़ी को आकार देने का शौक उनके मन में बस गया था, जो समय के साथ जुनून बन गया।

आज भी जसपाल अपने खाली समय में लकड़ी की आकृतियों को संवारते हैं। उनकी मेहनत और लगन ने इस पारंपरिक कला को जीवित रखने में मदद की है।

हालांकि इस जुनून के साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी हैं। जसपाल का कहना है कि काष्टकारों के लिए पर्याप्त सरकारी सुविधाएं और आधुनिक उपकरण नहीं हैं, जिससे कला को आगे बढ़ाना कठिन होता है।

जसपाल मानते हैं कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए, तो पहाड़ की यह पारंपरिक कला संरक्षित रहेगी और युवाओं के लिए रोजगार का अवसर भी बन सकती है।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां कलाकारों को पहचान दिलाने का माध्यम बनती हैं। चयनित प्रतिभागियों को राज्य स्तरीय मंच पर अपनी कला दिखाने का अवसर मिलेगा।

जसपाल रमोला जैसे कलाकार यह साबित करते हैं कि असली हुनर संसाधनों का मोहताज नहीं होता, बल्कि लगन और जुनून से ही पहचान बनती है।