डोनाल्ड ट्रंप ने खार्ग द्वीप पर हमला करने का दावा, ईरानी तेल निर्यात पर नजर

डोनाल्ड ट्रंप ने खार्ग द्वीप पर हमला करने का दावा, ईरानी तेल निर्यात पर नजर

ब्यरो रिपोर्ट

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग द्वीप पर ज़बरदस्त हमला करने की तैयारी की है। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है और देश की आर्थिक लाइफलाइन माना जाता है।

ट्रंप ने कहा कि अभी तक अमेरिकी सेना ने द्वीप की तेल फैसिलिटीज़ पर हमला नहीं किया है, लेकिन अगर ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट में तेल टैंकरों की आवाजाही रोकता है, तो अमेरिका इस पर पुनर्विचार कर सकता है।

सैटेलाइट डेटा से पता चला:

  • टैंकर ट्रैकिंग कंपनी TankerTrackers.com के अनुसार 28 फरवरी से अब तक 1.17 करोड़ बैरल ईरानी तेल होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर चीन की ओर भेजा गया।
  • कंपनी Capra ने बताया कि इस अवधि में लगभग 1.2 करोड़ बैरल तेल होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रा।

विश्लेषकों के अनुसार चीन हाल के वर्षों में ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। हालांकि, ईरानी तेल निर्यात में रफ्तार पहले से कम हो गई है, लेकिन चीन ने जनवरी 2026 तक अपने तेल भंडार को बढ़ा लिया, जिसके पास लगभग 1.2 अरब बैरल तेल मौजूद है, जो 3-4 महीने की घरेलू मांग को पूरा कर सकता है।

वैश्विक तेल बाजार पर असर:

  • युद्ध की स्थिति और तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गए हैं, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले यह 68-70 डॉलर था।
  • चीन में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें मंगलवार आधी रात से बढ़ाई गई।

विशेषज्ञों की राय:

  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रेमानंद मिश्रा के अनुसार अगर अमेरिका खार्ग द्वीप पर हमला करता है, तो ईरान के तेल निर्यात और चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा।
  • सैन्य विश्लेषक जस्टिन क्रम्प का कहना है कि ट्रंप अभी संयम बरत रहे हैं, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर आईआरजीसी की आर्थिक लाइफलाइन को निशाना बनाया जा सकता है।

संभावित परिणाम:

  • अगर खार्ग द्वीप पर हमला होता है या अमेरिकी नियंत्रण में चला जाता है, तो ईरान का तेल निर्यात लगभग रुक सकता है और द्वीप सैन्य ठिकाने के रूप में इस्तेमाल हो सकता है।
  • अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लगभग 5000 सैनिक युद्धपोतों के साथ खाड़ी की ओर भेजे जा रहे हैं।

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इस द्वीप पर हमला ईरान की आर्थिक और सैन्य क्षमता पर भारी असर डाल सकता है, जिससे मध्य-पूर्व और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उथल-पुथल बढ़ सकती है।