उत्तराखंड में रसोई गैस की किल्लत से आम जनता बेहाल

उत्तराखंड में रसोई गैस की किल्लत से आम जनता बेहाल

स्थान : खटीमा
रिपोर्टर : अशोक सरकार

प्रदेश के कई इलाकों में रसोई गैस की भारी किल्लत ने आम जनता का जीना मुश्किल कर दिया है। उपभोक्ता घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौट रहे हैं। सबसे ज्यादा नाराजगी प्रशासन के दावों पर है, जो जमीनी हकीकत के सामने ‘हवा-हवाई’ साबित हो रहे हैं।

गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें और महिलाओं का गुस्सा इस परेशानी की गवाही दे रहे हैं। सुबह की पहली किरण के साथ ही लोग गैस एजेंसियों के बाहर जमा हो जाते हैं, लेकिन शाम तक उन्हें नसीब केवल मायूसी ही होती है। महिलाओं का कहना है कि घर का चूल्हा ठंडा पड़ा है और बच्चों का स्कूल का टिफिन नहीं बन पा रहा, लेकिन विभाग की नींद नहीं टूट रही।

उपभोक्ता कमला यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हर बार कहा जाता है कि गाड़ी आ रही है, लेकिन शाम को बोर्ड लगा देते हैं कि स्टॉक खत्म हो गया। हम गरीब आदमी कहाँ जाएँ? एजेंसी में रेगुलेटर और पाइप के पैसे भी दुबारा लिए गए। यह सब बीजेपी के कारण हो रहा है, नहीं तो जनता की कभी ये हालत नहीं हुई।”

जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने कहा कि घर-घर तक गैस सिलेंडर पहुँचाया जाएगा और जिले में कोई पैनिक समस्या नहीं है। उन्होंने एजेंसियों से भी स्थिति को देखते हुए काम करने का निर्देश दिया। मगर खटीमा के शिव इंडियन गैस एजेंसी में आम जनता की हालत देखी जा सकती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि अधिकारी केवल बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन चूल्हा जलाने के लिए गैस नहीं मिल रही।

प्रशासन का दावा है कि जिले में गैस की सप्लाई सुचारू है और कालाबाजारी पर रोक लगी है। वहीं हकीकत यह है कि किल्लत ने कालाबाजारी को और बढ़ावा दिया है। रसूखदारों को तो गैस मिल रही है, लेकिन आम उपभोक्ता लगातार तारीखों के चक्कर काट रहा है।

स्थानीय लोगों का सवाल है कि अगर सप्लाई पूरी है, तो सिलेंडर कहां जा रहे हैं? क्या प्रशासन इस किल्लत को जल्द दूर कर पाएगा या फिर जनता इसी तरह सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर रहेगी?

उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बॉबी राठौर ने इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन और सरकार पर कड़ा हमला करते हुए चेतावनी दी कि अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो पार्टी उग्र आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगी।