कुमाऊँनी लोकगायक दिवान कनवाल का निधन, संगीत जगत में शोक

कुमाऊँनी लोकगायक दिवान कनवाल का निधन, संगीत जगत में शोक

स्थान – अल्मोड़ा
ब्यूरो रिपोर्ट

कुमाऊँनी लोकसंगीत को अपनी मधुर आवाज़ और विशिष्ट शैली से नई पहचान दिलाने वाले प्रख्यात लोकगायक दिवान कनवाल का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से कुमाऊँ क्षेत्र के सांस्कृतिक और संगीत जगत में गहरा शोक व्याप्त हो गया है।

दिवान कनवाल लंबे समय तक कुमाऊँनी लोकगायिकी के लोकप्रिय स्वर रहे। उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से पहाड़ की लोकसंस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनका चर्चित गीत द्वी दिनाका ड्यार शेरूवा यो दुनी में आज भी श्रोताओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। यह गीत कुमाऊँनी लोकसंगीत की पहचान बन चुका है और वर्षों बाद भी लोगों की जुबान पर बना हुआ है।

दिवान कनवाल की गायिकी का सफर रेडियो के दौर से शुरू हुआ। उस समय लोग उन्हें रेडियो पर सुनते थे, बाद में उनके गीत कैसेट और सीडी के माध्यम से घर-घर तक पहुंचे। बदलते समय के साथ उनके गीत सोशल मीडिया के माध्यम से नई पीढ़ी तक भी पहुंचते रहे।

वे कई सांस्कृतिक आयोजनों, होली मिलन समारोहों, कुमाऊँनी भाषा सम्मेलनों और साहित्यिक कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति से लोगों को मंत्रमुग्ध करते रहे। उनकी आवाज़ और प्रस्तुति शैली ने उन्हें लोकसंगीत की दुनिया में खास पहचान दिलाई।

दिवान कनवाल ने अपनी गायिकी के माध्यम से कुमाऊँनी लोकसंगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके गीतों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि पहाड़ की भाषा और संस्कृति को भी संरक्षित रखने का कार्य किया।

उनके निधन को लोकसंस्कृति की अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। सांस्कृतिक, सामाजिक और साहित्यिक जगत के लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है और कहा है कि उनका संगीत और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।