

ब्यूरो रिपोर्ट

जिम्बाब्वे दौरे पर अपने तूफानी प्रदर्शन से विश्व क्रिकेट में नई पहचान बनाने वाले 15 वर्षीय भारतीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने स्वदेश लौटते ही अपने संस्कारों से सभी का दिल जीत लिया। नागपुर के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद वैभव ने सबसे पहले अपनी बुआ के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। उनका यह भावुक और सम्मानपूर्ण अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।


जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब जीतकर लौटे वैभव का एयरपोर्ट पर फैंस और मीडिया ने जोरदार स्वागत किया। स्वागत के दौरान जैसे ही उनकी नजर अपनी बुआ पर पड़ी, वह तुरंत उनके पास पहुंचे और झुककर पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया यूजर्स का भी दिल जीत लिया।



महज 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रिकॉर्ड बनाने और आईपीएल का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के बावजूद वैभव की सादगी और विनम्रता बरकरार है। क्रिकेट प्रेमियों का कहना है कि इतनी कम उम्र में मिली बड़ी सफलता के बाद भी उनका व्यवहार यह साबित करता है कि उन्होंने अपने पारिवारिक संस्कारों को कभी नहीं छोड़ा।


यह पहली बार नहीं है जब वैभव ने अपने व्यवहार से लोगों का सम्मान जीता हो। इससे पहले भी वह आईपीएल और अन्य क्रिकेट दौरों के दौरान भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी समेत कई वरिष्ठ खिलाड़ियों के पैर छूकर सम्मान प्रकट करते नजर आ चुके हैं। उनके इस व्यवहार की अक्सर क्रिकेट जगत में सराहना होती रही है।
क्रिकेट के मैदान पर भी वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे दौरे में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने केवल 18 गेंदों में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने भारतीय टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई और उन्हें सीरीज का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।

वैभव ने इस दौरे में सबसे कम उम्र में प्लेयर ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड भी बनाया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए बीसीसीआई ने उनके पूरे परिवार के यात्रा और ठहरने की व्यवस्था की, ताकि वे स्टेडियम में बैठकर उनकी सफलता के साक्षी बन सकें।


वैभव सूर्यवंशी की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि प्रतिभा के साथ अच्छे संस्कार भी किसी खिलाड़ी की सबसे बड़ी पहचान होते हैं। मैदान पर रिकॉर्ड और मैदान के बाहर विनम्रता—इन दोनों ने वैभव को भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ सितारा ही नहीं, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा भी बना दिया है।

