
स्थान – पौड़ी

ब्यूरो रिपोट

पौड़ी जिले में एलयूसीसी घोटाले की पीड़ित महिलाओं ने धन वापसी और सीबीआई जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग को लेकर बुधवार को श्रीनगर से दिल्ली तक पदयात्रा शुरू की। महिलाओं का उद्देश्य अपनी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाना था, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उनकी पदयात्रा को श्रीनगर से करीब दो किलोमीटर दूर एनआईटी के समीप रोक दिया।


पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद महिलाएं सुबह करीब 10 बजे से मौके पर ही धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि वे लंबे समय से एलयूसीसी धोखाधड़ी की शिकार हैं और उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है। उनका आरोप है कि जांच प्रक्रिया धीमी है और धन वापसी को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।


प्रदर्शन के दौरान पूर्व पीसीसी सदस्य एवं चौरास क्षेत्र के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य डॉ. प्रताप भंडारी भी मौके पर पहुंचे और महिलाओं का समर्थन किया। पुलिस द्वारा पदयात्रा रोके जाने के विरोध में उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने डॉ. प्रताप भंडारी को हिरासत में ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन लोकतंत्र और नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन कर रहा है। काफी गहमागहमी के बाद पुलिस उन्हें करीब 14 किलोमीटर दूर कलियासौड़ पुलिस चौकी ले गई।

महिलाओं का आरोप है कि हिरासत में लेने के बाद उन्हें अंधेरे में छोड़ा गया। इसके बावजूद वे अपने संकल्प पर अडिग रहीं और शाम करीब 6:30 बजे पुनः पैदल ही दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। उनका कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी मांगों को उठाना बंद नहीं करेंगी।

वहीं क्षेत्राधिकारी अनुज कुमार का कहना है कि मामला सीबीआई में विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि बिना अनुमति के कार्यक्रम आयोजित किया गया था, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से महिलाओं को रोका गया। प्रशासन का दावा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन महिलाओं के दिल्ली कूच करने से मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच और धन वापसी को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

