
रिपोर्टर : संजय जोशी
स्थान : रानीखेत
भारतीय सेना की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी रेजिमेंटों में शामिल कुमाऊँ रेजिमेंट पिछले 200 वर्षों से अधिक समय से शौर्य, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रही है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर स्वतंत्रता के बाद 1947, 1962, 1965, 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध तक, रेजिमेंट ने हर मोर्चे पर अद्वितीय साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है।


कुमाऊँ रेजिमेंट की वीरता का अंदाजा इसके द्वारा प्राप्त सम्मान से लगाया जा सकता है। रेजिमेंट को अब तक 2 परमवीर चक्र, 11 महावीर चक्र, 4 अशोक चक्र और 82 वीर चक्र से अलंकृत किया जा चुका है। इसके साथ ही दो पद्म भूषण और देश को तीन थल सेनाध्यक्ष देने का गौरव भी इसी रेजिमेंट को प्राप्त है। निरंतर उत्कृष्ट सेवा और श्रेष्ठ संचालन के लिए वर्ष 2025 में सेंट्रल कमांड द्वारा कुमाऊँ रेजिमेंट को प्रतिष्ठित ‘यूनिट साइटेशन’ से सम्मानित किया गया।

कुमाऊँ रेजिमेंटल सेंटर (केआरसी), रानीखेत आज प्रशिक्षण, सैनिक कल्याण और क्षमता निर्माण का मजबूत केंद्र बन चुका है। पिछले तीन वर्षों में कुमाऊँ, नागा और अहीर क्षेत्रों के 5,500 से अधिक अग्निवीरों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही मेगा पूर्व सैनिक रैलियों और कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से पूर्व सैनिकों के लिए सहायता तंत्र को भी सशक्त किया गया है।

पूर्व सैनिकों के हितों को लेकर केआरसी ने उल्लेखनीय कार्य किया है। बीते दो वर्षों में ₹26 करोड़ से अधिक के लंबित दावों का निपटारा किया गया। 30 से अधिक आउटरीच कार्यक्रमों के जरिए 7,000 से ज्यादा पूर्व सैनिकों से सीधा संवाद स्थापित हुआ, जबकि 26,000 से अधिक शिकायतों का समाधान किया गया। उत्तराखंड विश्वविद्यालय के साथ किया गया एमओयू सैनिकों के कौशल विकास और शैक्षणिक उन्नयन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


इन्फ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सुविधाओं के क्षेत्र में भी केआरसी ने बीते दो वर्षों में बड़े बदलाव किए हैं। नर सिंह स्टेडियम का विकास, म्यूज़ियम-कम-रिसर्च सेंटर की स्थापना, प्रशिक्षण सुविधाओं का आधुनिकीकरण और आधुनिक शौचालय परिसर, शॉपिंग सेंटर, कैफेटेरिया, इन्फैंट्री चौक और कुमाऊँ कैफ़े जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण किया गया है। इन प्रयासों से रानीखेत के समग्र विकास और आधुनिकीकरण को नई गति मिली है।

इन्हीं उपलब्धियों की कड़ी में सेना दिवस 2026 के अवसर पर कुमाऊँ रेजिमेंट को एक और सम्मान प्राप्त हुआ। ब्रिगेडियर संजय कुमार यादव, VSM और सूबेदार मेजर दिनेश सिंह ने कुमाऊँ रेजिमेंट का प्रतिनिधित्व करते हुए माननीय राज्यपाल, उत्तराखंड से प्रतिष्ठित ‘राज्यपाल कप’ प्राप्त किया।

कुमाऊँ रेजिमेंट आज भी संचालन उत्कृष्टता, सैनिक कल्याण और राष्ट्र सेवा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के साथ भारतीय सेना की शान बनी हुई है।

