
स्थान : ऋषिकेश
ब्यूरो रिपोर्ट
उत्तराखंड के लिए चारधाम यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था और पहचान का भी अहम आधार है। हर साल लाखों श्रद्धालु यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन के लिए प्रदेश पहुंचते हैं। परंपरा के अनुसार चारों धामों के कपाट आमतौर पर अप्रैल के अंतिम सप्ताह या मई के पहले पखवाड़े में खुलते हैं। हालांकि इस वर्ष अभी आधिकारिक तिथियां घोषित नहीं हुई हैं, प्रशासन ने यात्रा की तैयारियां पहले ही शुरू कर दी हैं।


इसी क्रम में चारधाम यात्रा 2026 को लेकर पहली उच्चस्तरीय बैठक ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय और आईजी गढ़वाल रेंज राजीव स्वरूप ने की।

बैठक में यात्रा से जुड़े सभी प्रमुख जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य यात्रा को और सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाना था।

बैठक में दो प्रमुख बिंदुओं पर विशेष फोकस किया गया। पहला, पिछली यात्रा के अनुभवों की समीक्षा और सुधार पर। अधिकारियों ने चर्चा की कि पिछली यात्रा में किन व्यवस्थाओं ने बेहतर काम किया और किन क्षेत्रों में कमियां रही, ताकि आगामी यात्रा में सुधार किया जा सके।


दूसरा बड़ा विषय आगामी यात्रा मार्गों की स्थिति, सड़क और पुलों की मरम्मत, स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, एंबुलेंस सेवा, पेयजल, शौचालय, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन रहा। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन की तैयारियों और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की रणनीति पर भी विचार किया गया।

अधिकारियों ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोपरि रखने के लिए आपसी समन्वय और समयबद्ध कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चारधाम यात्रा 2026 सुचारू, सुरक्षित और सुविधाजनक हो।


