राजकोट ODI: टीम इंडिया की हार ने उजागर की तीन क्रूर रियलिटी

राजकोट ODI: टीम इंडिया की हार ने उजागर की तीन क्रूर रियलिटी

राजकोट। भारत और न्यूजीलैंड के बीच राजकोट में खेले गए दूसरे ODI मैच में टीम इंडिया को 285 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 7 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। न्यूजीलैंड की ओर से डेरिल मिचेल (131*) और विल यंग (87) की 162 रनों की साझेदारी ने भारतीय गेंदबाजों को पूरी तरह बेअसर कर दिया। इस मैच ने न सिर्फ सीरीज को बराबर किया बल्कि टीम इंडिया की वनडे रणनीति में छिपी तीन बड़ी कमजोरियों को भी उजागर किया।

1. बल्लेबाजी में पैटर्न की कमी:
भारतीय बल्लेबाजी अब तय पैटर्न पर चलती नजर आ रही है। पावरप्ले में ठीक-ठाक शुरुआत, मिडिल ओवर्स में धीमी रफ्तार और डेथ ओवर्स में चमत्कार की उम्मीद। राजकोट में भी यही देखा गया। मिडिल ओवर्स में स्ट्राइक रोटेशन और आक्रामकता की कमी ने स्कोरिंग रेट दबा दिया, जिससे 285 रनों का लक्ष्य आधुनिक ODI में औसत साबित हुआ।

2. गेंदबाजी में रणनीतिक खामियां:
भारतीय गेंदबाजों के पास राजकोट में न प्लान-A था, न प्लान-B। स्पिनरों के पास न टर्न था, न विकेट लेने की चतुराई; तेज गेंदबाज लेंथ और वैरिएशन में संतुलन नहीं दिखा पाए। परिणामस्वरूप कीवी बल्लेबाजी दबाव में कभी नहीं आई और मैच को आसानी से अपने पक्ष में किया।

3. ऑलराउंडर की भूमिका में उलझन:
नीतीश कुमार रेड्डी को ऑलराउंडर के रूप में फिट करने का प्रयास टीम बैलेंस को प्रभावित कर रहा है। नंबर 7 पर बल्लेबाजी में न फिनिशिंग क्षमता और न गेंदबाजी प्रभाव। अर्शदीप सिंह को बार-बार बाहर बैठाना और हार्दिक, जडेजा जैसे खिलाड़ियों का मिश्रित प्रयोग टीम की रणनीति में उलझन पैदा करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ODI में 6 बल्लेबाज + 1 विकेटकीपर + 4 विशेषज्ञ गेंदबाज या 5 गेंदबाज + 1 ऑलराउंडर मॉडल की बजाय फैंसी ऑलराउंडर मॉडल अपनाता है, जिससे बल्लेबाजी अधूरी, गेंदबाजी हल्की और डेथ ओवर्स अराजक हो जाती हैं।

न्यूजीलैंड की स्मार्ट प्लानिंग:
कीवी टीम ने लक्ष्य तोड़ा, रन-रेट संभाला, विकेट बचाए और मैच को योजना अनुसार खेला। भारत ने लक्ष्य डिफेंड करने की कोशिश में रणनीति में चूक की और दबाव में टूटा। राजकोट मैच ने यह साफ कर दिया कि हार मैदान पर हो सकती है, लेकिन सोच नहीं हारनी चाहिए।

विशेषज्ञों की राय में, भारत को ODI में स्पष्ट रोल निर्धारण करना होगा और टीम बैलेंस कायम रखना होगा। T20 के अनुभव को वनडे में सीधे लागू करना अब पर्याप्त नहीं।

आगे की चुनौती:
सीरीज का अंतिम मुकाबला 17 जनवरी को इंदौर में है। भारतीय टीम के लिए यह मौका है कि वे अपनी रणनीति और टीम संरचना पर पुनर्विचार करें। राजकोट की हार ने यह संकेत दिया कि केवल बल्लेबाजी और गेंदबाजी में प्रदर्शन से काम नहीं चलेगा, सोच और योजना में मजबूती जरूरी है।

निष्कर्ष:
राजकोट ODI ने तीन क्रूर सच्चाइयों को उजागर किया: पैटर्न वाली बल्लेबाजी की कमी, रणनीतिक गेंदबाजी का अभाव और ऑलराउंडर रोल की उलझन। अगर टीम इंडिया इन कमजोरियों को समय रहते नहीं सुधारती, तो वनडे फॉर्मेट में चुनौती बढ़ती जाएगी।

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