हिमांशी टोकस बनीं जूनियर महिला जूडो की दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी

हिमांशी टोकस बनीं जूनियर महिला जूडो की दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी

भारत की जूडो खिलाड़ी हिमांशी टोकस ने इतिहास रच दिया है। 20 वर्षीय हिमांशी अब जूनियर महिला वर्ग में दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले उन्होंने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित एशियन जूडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर एशिया की नंबर-1 जूडोका का खिताब भी अपने नाम किया था।

दिल्ली की मुनिरका गांव की बेटी ने बढ़ाया भारत का मान
दिल्ली के मुनिरका गांव की रहने वाली हिमांशी ने अपने खेल के दम पर भारत का नाम दुनियाभर में रोशन किया है। जूडो में दुनिया की टॉप रैंकिंग हासिल करने वाली हिमांशी पहली भारतीय जूडोका हैं।

कैसे बनीं दुनिया की नंबर-1
हिमांशी ने अपने सफर के बारे में बताया कि बचपन में जूडो प्रैक्टिस के दौरान उन्हें चोट लगी थी। उनकी मां इस बात को लेकर चिंतित थीं और जूडो छोड़ने की सलाह दी। लेकिन हिमांशी ने मां की बात मानने के बजाय पड़ोस में स्थानीय मिश्रित मार्शल आर्ट एकेडमी में दाखिला लिया और मेहनत जारी रखी।

उन्होंने जूनियर महिला 63 किलोग्राम भार वर्ग में दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी बनने के साथ ही एशिया जूनियर चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर एशिया की नंबर-1 जूडोका बनने का गौरव भी हासिल किया।

दादी और नानी ने दिया सहारा
हिमांशी ने बताया कि मां की सख्ती के बावजूद उनकी दादी और नानी ने हमेशा उनका साथ दिया। उनकी दादी उन्हें खेल छोड़ने से रोकती थीं और लगातार प्रोत्साहित करती थीं।

कोच और पिता का योगदान
हिमांशी के कोच यशपाल सोलंकी ने बताया कि हिमांशी के पिता रवि टोकस, जो खुद भी पूर्व जूडो खिलाड़ी रह चुके हैं, ने साल 2020 में उन्हें सोलंकी एकेडमी ऑफ फिटनेस एंड कॉम्बैट स्पोर्ट्स (AFACS) में दाखिला दिलवाया। वर्तमान में हिमांशी भोपाल के SAI NCoE केंद्र में यशपाल सोलंकी की कोचिंग में प्रशिक्षण ले रही हैं।

हिमांशी का कहना है, “देश के लिए पहला स्थान हासिल करना बहुत गर्व की बात है। मैं अच्छा प्रदर्शन जारी रखना चाहती हूं और भारत के लिए और मेडल जीतना चाहती हूं।”