


लोकेशन : बद्रीनाथ/ज्योतिर्मठ
रिपोर्ट : संजय कुंवर



श्री बद्रीनाथ धाम में प्राधिकरण की नीतियों, मास्टर प्लान के तहत हो रहे महा-निर्माण कार्यों, और धाम की प्राचीन सनातनी सांस्कृतिक धरोहरों की अनदेखी के विरोध में चल रहा संयुक्त जन आंदोलन आज 19वें दिन भी जारी रहा। श्री बद्रीश संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले हो रहे इस आंदोलन को अब स्थानीय जनता, होटल व्यवसायियों, व्यापारियों, पंडा समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।



धरने का चौथा दिन, महिलाओं ने संभाली कमान
बीते चार दिनों से साकेत चौराहे पर चल रहे धरने को आज विशेष रूप से स्थानीय मातृशक्ति ने संभाला। आंदोलनकारी महिलाओं ने कहा कि बद्रीनाथ धाम सिर्फ एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत केंद्र है, जिसे सरकारी परियोजनाओं के नाम पर बदला नहीं जा सकता।



आज धरने पर बैठने वाली प्रमुख महिलाओं में यशोदा माता, साध्वी जूना अखाड़ा, कुसुम मेहता (बामणी गांव), शांति शर्मा, भवानी भंडारी, प्रेमा भंडारी, विजया देवी, अंजलि कोठारी, चंदा राणा और विजया डाड़ी शामिल रहीं।



यूकेडी का समर्थन
धरना स्थल पर आज उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के प्रदेश युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष आशीष नेगी भी पहुंचे और आंदोलनकारियों को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार यदि स्थानीय जनता की भावनाओं की अनदेखी करती है, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।



प्रशासन पर आरोप
संघर्ष समिति का आरोप है कि मास्टर प्लान के नाम पर बद्रीनाथ की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को मिटाया जा रहा है। ऐतिहासिक स्थल, पारंपरिक वास्तुकला और पवित्र स्थलों को कंक्रीट में बदला जा रहा है, जिससे तीर्थ की आत्मा को आघात पहुंच रहा है।



निष्कर्ष:
यह आंदोलन अब सिर्फ एक स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि धार्मिक-सांस्कृतिक अस्मिता और जनसहमति के अधिकार की लड़ाई बनता जा रहा है। यदि सरकार ने संवाद नहीं किया, तो बद्रीनाथ धाम में असंतोष की यह चिंगारी कहीं राज्यव्यापी आंदोलन में न बदल जाए।



