बारिश बनी ज़हर की दस्तक: रामनगर के मालधन चौड़ में प्राकृतिक कहर, घरों में घुसा जंगल

बारिश बनी ज़हर की दस्तक: रामनगर के मालधन चौड़ में प्राकृतिक कहर, घरों में घुसा जंगल

स्थान: रामनगर, उत्तराखंड
संवाददाता: सलीम अहमद साहिल

“इस बार सिर्फ बारिश नहीं आई है, साथ में ज़हर, डर और मौत भी लेकर आई है।”
रामनगर क्षेत्र के मालधन चौड़ में इन दिनों ऐसा ही मंजर देखने को मिल रहा है, जहां प्राकृतिक आपदा अब सिर्फ जंगल तक सीमित नहीं रही, बल्कि मानव बस्तियों तक मौत का साया लेकर पहुंच गई है।

यह इलाका उत्तराखंड के उस हिस्से में है, जो तराई के घने वनों और कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व से सटा हुआ है। आमतौर पर पर्यटक यहां जंगल सफारी का आनंद लेने आते हैं, लेकिन अब यही जंगल स्थानीय लोगों के लिए खौफ और तबाही का पर्याय बन गया है।


बारिश के साथ घरों में दाखिल हुआ डर

लगातार हो रही बारिश ने मालधन चौड़ में तबाही का वो मंजर खड़ा कर दिया है, जिसे देखकर रूह कांप जाती है। क्षेत्र में निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति है, घर-घर पानी से भरे हुए हैं, और सबसे खतरनाक बात — जंगलों से निकलकर जहरीले सांप, कीड़े-मकोड़े, हिंसक तेंदुए जैसे जीव अब बस्तियों में घुसने लगे हैं।

ग्रामीण अपने छोटे बच्चों को गोद में उठाकर घरों से निकालते नजर आ रहे हैं, क्योंकि हर कोना खतरे से भरा है। खाने-पीने का सारा सामान बर्बाद हो चुका है, और जीवन अब जिंदा रहने की जद्दोजहद में बदल गया है।


स्थानीय प्रशासन हरकत में, लेकिन समाधान नहीं

क्षेत्र पंचायत सदस्य बसंती आर्य खुद मोटर पंप लगाकर पानी निकालने में जुटी हैं।
राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और नुकसान का आंकलन कर रही है, लेकिन स्थायी समाधान आज भी अधर में है।

ग्रामीणों की पीड़ा स्पष्ट है —

“हर साल यही होता है, हर बार यही डर। लेकिन सरकार और प्रशासन हर बार सिर्फ आंकड़े गिनते हैं, समाधान नहीं देते।”


जंगल की सरहद पार कर रहा है खतरा

ये केवल जलभराव की समस्या नहीं है। ये एक गंभीर मानव-वन्यजीव संघर्ष का संकेत है। जब भी बारिश होती है, जंगलों का पानी जानवरों और कीटों के साथ इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ जाता है। अब ये केवल पर्यावरणीय चिंता नहीं, बल्कि जीवन और मौत का सवाल बन चुका है।


समाप्ति नहीं, चेतावनी है ये!

मालधन चौड़ आज एक सवाल बनकर खड़ा है — क्या जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों को हर बार प्रकृति के रहमोकरम पर छोड़ा जाएगा?

बारिश के साथ मौत, पानी के साथ जहर, और लापरवाही के साथ तबाही — यही त्रासदी बार-बार दोहराई जा रही है। अगर अभी भी स्थायी योजना नहीं बनाई गई, तो अगली बारिश सिर्फ संपत्ति नहीं, मासूम जानें भी लील सकती है।