

स्थान : चंपावत
रिपोर्ट : लक्ष्मण बिष्ट


मुख्यमंत्री के आदर्श जिले चंपावत के दूरस्थ सील गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे ग्रामीणों की एक मार्मिक कहानी सामने आई है। 13 वर्षीय निशा बिष्ट, जो अचानक बीमार हो गई, उसे उसके पिता सुरेश सिंह बिष्ट ने गांव में सड़क न होने के कारण अपनी पीठ पर 8 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ते हुए मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से वाहन के जरिए उसे 15 किलोमीटर दूर लोहाघाट उप जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।


सालों से अधूरी है सड़क की उम्मीद
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सुतेड़ा-सील सड़क निर्माण की घोषणा की गई थी। लेकिन चार साल बाद भी सड़क गांव तक नहीं पहुंची।


ग्रामीण सुरेश सिंह बिष्ट, रमेश बिष्ट, सोनू बिष्ट और दीवान सिंह ने बताया कि


- पूर्व में एक 11 वर्षीय बच्चे की मौत इलाज के अभाव में हो चुकी है
- एक महिला की जंगल में ही डिलीवरी हुई थी
- ग्रामीण आज भी राशन, दवाई, गर्भवती महिलाएं और बीमारों को डोली या पीठ पर लादकर मुख्य सड़क तक लाते हैं
- 2022 में ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया था


बच्चों को भी भुगतना पड़ रहा खामियाजा
गांव में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य—तीनों मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
- बच्चे 5-8 किलोमीटर जंगल के रास्ते स्कूल जाते हैं
- दवाइयों, राशन व आपातकाल में पैदल ही निर्भरता

PWD का पक्ष
लोक निर्माण विभाग लोहाघाट के अधिशासी अभियंता हितेश कांडपाल ने बताया कि:

“सुतेड़ा से सील तक लगभग 4 किलोमीटर सड़क निर्माण के प्रस्ताव पर पहले वन विभाग की आपत्ति थी, जिसका अब निस्तारण हो चुका है। प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है, स्वीकृति मिलने के बाद जल्द काम शुरू किया जाएगा।”


ग्रामीणों की फिर गुहार
ग्रामीणों ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी चंपावत से अपील की है कि सड़क निर्माण की घोषणा को धरातल पर उतारा जाए, ताकि भविष्य में किसी और को अपनी बीमार बेटी को पीठ पर ढोने की विवशता न झेलनी पड़े।

यह घटना सिर्फ एक बीमार बच्ची की नहीं, एक सिस्टम की तस्वीर है, जहां योजनाएं कागज़ों पर हैं, और लोग आज भी जीवन की जंग अकेले लड़ रहे हैं।


