


उत्तकाशी

रिपोर्ट -दीपक नौटियाल

उत्तरकाशी जनपद का दूरस्थ क्षेत्र गाजणा, जो पहले बेरोज़गारी, पलायन और बंद होते स्कूलों की समस्या से जूझ रहा था, अब एक नई दिशा में अग्रसर है। यहां के 24 गांवों में लगातार पलायन हो रहा था, खेती बंजर हो रही थी और मुख्य मार्ग टिहरी बांध के निर्माण से झील में समा गए थे, जिससे आवाजाही कठिन हो गई थी।



कोविड काल में बदलाव की शुरुआत

कोविड-19 महामारी के दौरान गाजणा के लोग अपने गांव लौटे और मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत सोलर प्लांट स्थापित कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाए। इस योजना के तहत एक परिवार का एक सदस्य 20 से 200 किलोवॉट तक का सोलर प्लांट लगा सकता है, जिससे उत्पादित बिजली उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) द्वारा खरीदी जाती है। इससे न केवल बिजली की समस्या हल हुई, बल्कि ग्रामीणों को स्थायी आय का स्रोत भी मिला।


जैविक खेती और होम स्टे से नई पहचान

गाजणा के युवाओं ने पुराने मकानों को डेवलप कर होम स्टे के रूप में विकसित किया, जिससे पर्यटन की संभावनाओं को भी पंख लगे। इसके अलावा, उन्होंने कीवी और जैविक फसलों की खेती शुरू की,



जिससे इस क्षेत्र को कीवी और जैविक फसलों की बेल्ट के रूप में नई पहचान मिली है। इससे ग्रामीणों की आजीविका में बड़ा बदलाव आया है और पलायन की मार झेल चुका यह क्षेत्र अब पर्यटकों से गुलजार हो गया है।


सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भरता की ओर
गाजणा क्षेत्र में सोलर प्लांट की स्थापना से न केवल बिजली की समस्या हल हुई, बल्कि यह क्षेत्र सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक उदाहरण बन गया है। उत्तराखंड सरकार की मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत प्रदेश में सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ रहा है, जिससे पलायन रोकने और स्वरोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।

निष्कर्ष
गाजणा क्षेत्र की यह सफलता कहानी यह दर्शाती है कि सही दिशा में उठाए गए कदमों से किसी भी क्षेत्र की तस्वीर बदली जा सकती है। सौर ऊर्जा और जैविक खेती जैसे नवाचारों से न केवल पर्यावरण की रक्षा होती है, बल्कि ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आता है। यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बन सकता है।


