बागजाला में पेयजल संकट और जर्जर सड़कों के विरोध में किसान महासभा का धरना प्रदर्शन

बागजाला में पेयजल संकट और जर्जर सड़कों के विरोध में किसान महासभा का धरना प्रदर्शन

स्थान : हल्द्वानी

बागजाला क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को लेकर अखिल भारतीय किसान महासभा ने सोमवार को डीएफओ तराई पूर्वी वन प्रभाग कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना प्रदर्शन किया। ग्रामीणों और किसान नेताओं ने पेयजल संकट, जर्जर सड़कों और भूमि अधिकार से जुड़ी समस्याओं को लेकर वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ गहरी नाराजगी व्यक्त की।

धरने का नेतृत्व कर रहे भाकपा माले के नैनीताल जिला सचिव डॉ. कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, “आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी बागजाला के लोग पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्षरत हैं। यह अमृतकाल नहीं, विडंबनाओं का काल बन गया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन की ‘हर घर नल, हर घर जल योजना’ वन विभाग की रोक के कारण अधर में लटकी हुई है और विधायक से जनहित में हस्तक्षेप करने की मांग की।

किसान महासभा बागजाला की अध्यक्ष उर्मिला रैस्वाल ने कहा कि योजना के ठप पड़ने से पुरानी पेयजल व्यवस्था भी चरमरा गई है। वहीं गांव की सड़कें बदहाल स्थिति में हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। उन्होंने तत्काल सड़क मरम्मत की मांग की।

किसान महासभा के प्रचार सचिव पंकज चौहान ने विभागों की आपसी टकराहट को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “जल संस्थान और वन विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं और जनता पिस रही है।”

गौरतलब है कि बागजाला गांव की समस्याओं को लेकर पहले भी 13 फरवरी 2025 को एक प्रतिनिधिमंडल ने डीएफओ से मुलाकात की थी। उस समय आश्वासन मिला था कि योजना पर कोई रोक नहीं है और सड़क मरम्मत के लिए निरीक्षण किया जाएगा। लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी कोई कार्य नहीं हुआ, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।

धरने के माध्यम से उठाई गई प्रमुख मांगे:

  1. ‘हर घर नल’ योजना का कार्य तत्काल दोबारा शुरू किया जाए और सभी बाधाएं हटाई जाएं।
  2. बागजाला गांव की टूटी और खतरनाक सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाए।
  3. वन भूमि पर निवास कर रहे लोगों को ‘जो जहां है, वहीं रहने का अधिकार’ दिया जाए और राज्य सरकार को अनापत्ति प्रस्ताव भेजा जाए।

आंदोलन में भाग लेने वालों में डॉ. कैलाश पाण्डेय, उर्मिला रैस्वाल, पंकज चौहान, रईस अहमद, चन्दन सिंह मटियाली, गोपाल सिंह बिष्ट, मीना भट्ट, पुष्पा भट्ट, हनीफ, लच्छी राम, मुन्नी, अनीता, लीला, हीरा देवी, और कई अन्य ग्रामीण शामिल रहे।

जनता की चेतावनी: यदि समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं किया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक किया जाएगा।