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रिपोटर -दीपक नौटियाल

स्थान -उत्तरकाशी

देवभूमि उत्तराखंड अपने कहीं रहस्यों के लिए जानी जाती है आज हम आपको दिखाएंगे जनपद उत्तरकाशी के डुण्डा में स्थित कचडू देवता मन्दिर कहा जाता है कि हजारों साल पहले कचडू नामक युवक हिमाचल से अपनी बहिन को लेने के लिए बरसाली गांव आ रहा था रास्ते में बह आराम करने के लिए बैठ गया और बांसुरी बजाने लगा इस बीच उसे परियों ने हर लिया और अपने साथ चलने को कहने लगी जिस पर कचडू ने अपनी बहिन को अपने गांव ले जाने के बाद आने का परियों से वादा किया


फिर वह अपनी बहिन को अपने गांव ले गया समय आने पर परियों ने उसे साथ चलने को कहा और वह परियों के साथ चला गया पर उसने शर्त रखी कि वह अपनी मांके हर काम में हाथ बंटायेगा जिस पर परियों ने कहा कि जिस दिन तुम्हें कोई देख लेगा उसके बाद तुम कुछ नहीं कर पाओगे मरने के बाद भी वह चुपके से रात को अपने घर के सारे काम करने लगा अचानक गांव वालों को इसकी भनक लगी और गांव वालों ने उनकी माता को सारी बात बताई उनकी माता ने सच जानने के लिए छुप गयी इस बीच कचडू मनुष्य भेष में घर के कार्य कर रहा था

कि उनकी मां ने उन्हें देख लिया और वह अन्तर्ध्यान हो गये इसी बीच डुण्डा में एक पेड़ के नीचे देवता के रूप में अवतरित हुए कहा जाता है कि जनपद में नवविवाहित जोड़ों एवं नये वाहन खरीदने वालों सहित जनपद में आने वाले नये अधिकारी कर्मचारी को यहां पर पूजा एवं श्री फल चढ़ाना जरूरी होता है नहीं उन्हें बड़ी परेशानियों से गुजरना पड़ता है


