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रिपोटर -संजय जोशी

स्थान -रानीखेत

यहां शिव मंदिर सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ विश्वम्भर बिशन दत्त जोशी’शैलज’ द्वारा लिखित पुस्तकों ‘कुमाउनी रामायण रुपांतरण’ और ‘पूर्व राग व्याकरण नव प्रकल्पन’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का आयोजन रानीखेत सांस्कृतिक समिति ने किया ।शिव मदिर सभागार में आयोजित पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम में शिवमंदिर धर्मशाला समिति के अध्यक्ष कैलाश पांडे, महासचिव अतुल अग्रवाल, छावनी नामित सदस्य मोहन नेगी और हस्तशिल्पी भुवन साह ने डॉ ‘शैलज’ की पुस्तकों का लोकार्पण किया।इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने लोक भाषा कुमाउनी में रामायण का रुपांतरण करने के लिए डॉ शैलज का आभार जताते हुए कहा


कि इस कृति से कुमाउनी साहित्य में वृद्धि होने के साथ ही मातृ भाषा के प्रचार में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि उम्र के इस पड़ाव में डॉ शैलज का लेखन प्रशंसा योग्य है। शिवमंदिर समिति की ओर से डॉ विश्वम्भर बिशन दत्त जोशी ‘शैलज’ का शाल ओढ़ाकर नागरिक सम्मान भी किया गया।कार्यक्रम का संचालन करते हुए साहित्यकर्मी विमल सती ने डॉ शैलज की साहित्य यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ईडा़ बजीना गांव निवासी डॉ शैलज द्वारा गोस्वामी तुलसीदास विरचित रामचरितमानस के पूर्व में आपने बाल कांड और सुंदर काण्ड का कुमाउनी रूपांतरण किया था।अब श्री रामचरितमानस के सातों सोपानों का प्रकाशन कुमाउनी रामायण है। रामायण जैसी धार्मिक, सांस्कृतिक कृति के लोकभाषा में आने के बाद आशा की जानी चाहिए जन जन तक कुमाऊंनी भाषा के प्रचार व रूझान में अभिवृद्धि होगी।

गोस्वामी जी की रामचरितमानस का अनुवाद अक्षरश: नहीं है कथानक का वर्णन पूरा वही है ,उपमान कहीं -कहीं कुमाउनी लिए गए हैं। कुछ नये छंदों की रचना आपने की है वहीं मानस से आए सभी छंदों को अपने छंदोबद्ध किया है, मात्रिक,वार्णिक छंदों में ये रचना प्रयास गेय रूप में आकर्षक बन पड़ी है।इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया।



