एक सुर में बोले सभासद बोर्ड का अपमान कर रहा है अधिशासी अधिकारी

एक सुर में बोले सभासद बोर्ड का अपमान कर रहा है अधिशासी अधिकारी

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रिपोटर -रिजवान अली

स्थान -गदरपुर

एक सुर में बोले सभासद बोर्ड का अपमान कर रहा है अधिशासी अधिकारी ज्ञापन देते ही केपीएस को मिला एक माह का मोका ईओ बोले फाइनल अथारिटी चेयरमैन हमने नोटिंग में लिख दिया चेयरमैन का जैसा आदेश एक माह का रिचार्ज मिलने से भी केपीएस खुश नहीं भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी नगरपालिका एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।सभी सभासदों ने मिलकर अधिसासी अधिकारी पर ठेके में मनमानी करने का आरोप लगाया है कहा है कि बोर्ड की मीटिंग में हम सभी ने मिलकर कहा था कि ठेका प्रथा समाप्त की जाए और आउटसोर्सिंग से सफाई कर्मचारी रखें जाएं लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।ईओ मनमानी पर उतारू हैं।ठेके प्रथा को निरस्त कराने की मांग की गई है।सभासदों का कहना है ईओ सभी सभासदों को सस्पेंस में रख रहे है और गुमराह करने में लगे हैं।अपने लोगो को ठेके देने के लिए कानूनी प्रक्रिया का ऐसा जाल बुन रहे हैं जिससे अपनी मनमानी को अंजाम दिया जा सके सभी सभासदों ने हस्ताक्षर कर यह ज्ञापन दिया है।उधर जैसे ही ज्ञापन दिया गया इसके तुरंत बाद ईओ की ओर से एक लेटर जो 27 मार्च का दर्शाया गया है तेजी से वायरल किया गया जिसमें एक माह का टेंडर केपीएस को बढ़ा दिए जाने का हवाला दिया गया है।आनन फानन में बेक डेट में तैयार किया गया यह लेटर आते ही ईओ पर लगे इन आरोपों पर कि केपीएस से सेटिंग चल रही है सबूत पेश कर दिया है।इससे बड़ी भ्रष्टाचार की बुनियाद और किया होगी जब पिछले एक महीने से केपीएस पर आरोप लगते लगते टेंडर की प्रक्रिया जानबूझ कर लेट कर दी गई समय पर पूरी नहीं कराई गई और अब एक महीने की सेटिंग के आरोप नगरपालिका पर लगाए जा रहे हैं

।अब देखना यह है कि केपीएस एक माह बाद फिर से अपना समय बढ़वा पाने में कामयाब होगा या नगर पालिका कानून की खानापूर्ति करके कोई नया पैंतरा दिखायेगी।पुराने ईओ आज भी ट्रेनिंग देने में लगे हुए हैं।ठेकेदारों से अलग मीटिंग का दौर और चेयरमैन पर करोड़ों रुपए डकारने का आरोप शुरू से ही सभासद आवाज देकर लगाते आए हैं।उधर ईओ से आनन फानन में जारी पत्र में एक माह का समय बढ़ाए जाने के सवाल पर ईओ ने कहा कि चेयरमैन साहब का ऑर्डर है फाइनल अथारिटी चेयरमैन है हम क्या कर सकते हैं जैसा वो कहते है हम करते हैं ईओ ने बताया कि हमने नोटिंग में लिखा है कि चेयरमैन उचित आदेश करें।उनका आदेश है हम ने कर दिया।मेरे चाहने या ना चाहने से कुछ नहीं होगा मेरे लिखने से थोड़ी हो जायेगा।कुछ भी ही ईओ ने अपनी प्रशासनिक ताकत को एक किनारे करते हुए चेयरमैन को जिम्मेदार बना कर अपना उल्लू सीधा कर लिया है ।चेयरमैन के पल्ले में डाल कर शासन की कानूनी प्रक्रिया में खेल करने का काम ईओ के जरिए अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है।अब देखना यह है कि केपीएस का एक माह का रिचार्ज तो हो गया है यह रिचार्ज आगे बढ़ेगा या कोई नया पैंतरा सामने आएगा कुछ भी हो अब इस खेल में पैसे जरूर बढ़ेंगे और नगरपालिका की राजस्व वसूली बढ़ेगी। केपीएस वाले बोले हमें पता भी नही कब टाइम बढ़ा दिया गदरपुर नगर पालिका का कानून अलग गदरपुर।नगर पालिका में सफाई का ठेका चला रही केपीएस को पता भी नही कि एक माह का समय बढ़ा दिया गया है।केपीएस के मिस्रा जी बोले हमे कुछ नहीं पता कितना टाइम बढ़ाया है क्या किया है जाने हमें कुछ पता ही नहीं हम तो एग्री नहीं हैं जबरदस्ती समय बढ़ाया जा रहा है।कल आप दस बजे फोन कीजिए तब बताएंगे अभी हमें वर्क ऑर्डर भी नहीं मिला है कोन सा वर्क ऑर्डर मिला है।किया दिए हैं क्या लिखकर दिए है।हमे तो कुछ जानकारी कम से कम हो। हमें ईओ ने अभी कुछ नही बताया ना चेयरमैन ने बताया है।आज शाम को ही हमारे कर्मचारी को कोई पेपर रिसीव करवाए हैं आज शाम को ही।केपीएस का कहना है कि चार साल से में काम कर रहा था कहा की जेम पोर्टल पर डाला है बिना किसी नियम और कानून के नगरपालिका गदरपुर में ईओ और चेयरमैन कर रहे हैं।उन्होंने कहा की जेम पर जो शर्ते रखी गई हैं उससे सप्ष्ट है कि किसी अपने को ठेका देने की तैयारी पूरी है तीन माह का अनुभव ही मांगा गया है।

श्री मिस्रा ने कहा कि गदरपुर नगरपालिका का कानून अलग है और पूरे प्रदेश में जो व्यवस्था लागू है वो अलग है।मज़ाक बना कर रख दिया है नगरपालिका को ईओ अपनी मनमानी में गदरपुर।भ्रष्टाचार में लिप्त के आरोपों से घिरी नगरपालिका को ईओ ने कानूनी प्रक्रिया का मज़ाक बना कर रख दिया जो मन में आए नोटिंग की ओर पत्र जारी कर दिया।पारदर्शी तरीका छोड़ स्वार्थ को निहित में रखकर फैसले लिए जा रहे है।सभी सभासद एक तरफ लेकिन आवाम के बीच नगरपालिका भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी हैं जिस गली से गुजर जाए लोगों आपस में आरोप लगाते नज़र आते हैं करोड़ों डकार गया नमाज़ को जा रहा है जिधर गुजर जाएं लोग कहते है यह बेचारे क्या करे इनके अंदर शासन की प्रक्रिया सही ढंग से लागू करवा पाने की ताकत ही नही है।