बर्खास्त कर्मचारियों के पक्ष में बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी

बर्खास्त कर्मचारियों के पक्ष में बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी

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रिपोटर -ब्यूरो रिपोट

स्थान -देहरादून

उत्तराखंड में एक बार फिर से विधानसभा से बर्खास्त कर्मचारियों का मुद्दा गर्मा गया है। दअरसल इन बर्खास्त कर्मचारियों के पक्ष में बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी आ गए हैं उन्होने खुलकर सरकार के इस फैसले की आलोचना की है. साथ ही सीएम पुष्कर सिंह धामी से बर्खास्त 228 कर्मचारियों को पुन नियुक्ति देने की मांग की है। ऐसा ना करने पर स्वामी सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे…स्वामी ने दावा किया है कि अबतक वह कोई भी मुकदमा नहीं हारे हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि ये फैसला भी वह जीतेंगे..अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता की ओर से उठाए गये सवालों के बाद सरकार से लेकर संगठन तक बेकफुट पर हैं..बीजेपी का तर्क है कि स्वामी ने अधिवक्ता के तौर पर ये सब बात रखी है..बाकी अंतिम निर्णय विधानसभा से ही लिया जाएगा

.वहीं विपक्ष ने इन कर्मचारियों की पुन नियुक्ति की मांग की है सवाल ये है कि क्या धामी सरकार इन सब दबाव के बाद बर्खास्त कर्मचारियों को पुन नियुक्ति देगी या नहीं करेगे चर्चा पहले रिपोर्ट देखिएउत्तराखंड में एक बार फिर से विधानसभा से बर्खास्त कर्मचारियों का मुद्दा गर्मा गया है। दअरसल इन बर्खास्त कर्मचारियों के पक्ष में बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी आ गए हैं उन्होने खुलकर सरकार के इस फैसले की आलोचना की है. साथ ही सीएम पुष्कर सिंह धामी से बर्खास्त 228 कर्मचारियों को पुन नियुक्ति देने की मांग की है। ऐसा ना करने पर स्वामी सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे…स्वामी ने दावा किया है कि अबतक वह कोई भी मुकदमा नहीं हारे हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि ये फैसला भी वह जीतेंगे…..वहीं बीजेपी अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व में कानून मंत्री रहे सुब्रमणयम स्वामी की ओर से उठाए गये सवालों के बाद सरकार से लेकर संगठन तक बेकफुट पर हैं….बीजेपी का तर्क है कि स्वामी ने अधिवक्ता के तौर पर ये सब बात रखी है….बाकी अंतिम निर्णय विधानसभा से ही लिया जाएगा…..सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं…वहीं विपक्ष ने इन कर्मचारियों की पुन नियुक्ति की मांग करते हुए सफेदपोश नेताओं पर भी कार्रवाई की मांग करी है जिनके कार्यकाल में इन कर्मचारियों को नियुक्ति दी गई हैकुल मिलाकर विधानसभा के बर्खास्त कर्मचारियों के मामले ने धामी सरकार की मुश्किलें बढ़ा रखी है…..पहले सरकार कर्मचारियों और विपक्ष की घेराबंदी से परेशान थी लेकिन अब सरकार की मुश्किलें अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रहमणम ने बढ़ा दी है।

ऐसे में सवाल ये है कि एक ही संस्थान में एक ही प्रक्रिया से नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों की वैधता पर दो अलग-अलग निर्णय कैसे लिए जा सकते हैं? जब एक ही प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों को नियुक्ति दी गई है तो फिर 2016 से 2022 तक के कर्मचारियों पर ही क्यूं कार्रवाई की गई है। क्यों 2001 से 2015 की अवैध तरीके से की गयी नियुक्तियों को संरक्षण दिया जा रहा है…क्या सरकार कोर्ट की फटकार का इंतजार कर रही है। ऐसे अनगिनत सवाल है जिसके जवाब का सबको इंतजार है