यूं तो पहाड़ों में विराजमान देव देवता अपनी कलाओं के लिए जानें जाते हैं

यूं तो पहाड़ों में विराजमान देव देवता अपनी कलाओं के लिए जानें जाते हैं

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रिपोटर -दीपक नौटियाल

स्थान -उत्तरकाशी

यूं तो पहाड़ों में विराजमान देव देवता अपनी कलाओं के लिए जानें जाते हैं पर लोग आधुनिकता की आड़ में नास्तिकता के चोले ओढ़कर देवताओं को भला बुरा कहते हैं पर आज हम आपको ले चलते हैं देव भूमि उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद मे जहां भगवान भोलेशंकर का निवास स्थान है और यहां की संस्कृति देश विदेश में प्रसिद्ध है जहां काशीविश्वनाथ अपनी समाधी रमाये हुए हैं वहीं मां पार्वती अपने विभिन्न रूपों में भगवान शंकर की आराधना कर रही है

आज हम आपको दिखाएंगे मां गोरा यानि कि पार्वती का अवतार मां सुरकण्डा की दैविक शैली जो काशीविश्वनाथ मन्दिर में विशाल किसी सहारे के भगवान शंकर के समीप प्रकट हुई जी हां आप जिस डोली को झूलते हुए देख रहे हैं वह है मां सुरकण्डा जो उत्तृकाशी भ्रमण पर आई हुई है पर भगवान काशीविश्वनाथ मन्दिर में देवी भी अपनी भावनाओं को नहीं रोक पायी है आप देख सकतें हैं कि देव डोली कैसे विना किसी सहारे के नाच रही है और अपने भक्तों को आशीर्वाद दे रही है साथ ही ये डोली जोकि टिहरी गढ़वाल से यहां स्नान के लिए आईं हैं कैसे भगवान शंकर के आशियाने यानी काशीविश्वनाथ मन्दिर में अपनी कला दिखा रही है पोराणिक मान्यताओं के आधार पर मां सती के अंश इस संसार में जिस भी जगह गिरा वहां सिद्ध पीठ के नाम से प्रसिद्ध हुआ है

लेकिन समय केहसाथ ओर पोरांणिक मान्यताओं कै अनुसार मां सती के अंश से बनी देवीयां समय समय पर गंगा स्नान करने के लिए जाती रहती है और भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त करतीं हैं पर आज हम आपको दिखाएंगे कि कैसे मां सुरकण्डा भगवान काशीविश्वनाथ के सामने विना किसी सहारे के अपना भाव प्रकट करती हैं