73 वां गणतंत्र दिवस मना रहा आज देश, जानिए क्या है 26 जनवरी का इतिहास

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आज देश 73 वां गणतंत्र दिवस मना रहा है | गणतंत्र दिवस भारत का राष्ट्रीय पर्व है | जो हर वर्ष 26 जनवरी को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है | गणतंत्र दिवस मनाने की खास वजह तो सभी जानते ही होंगे | इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। जिसके बाद पर्तिवर्ष गणतंत्र दिवस देश में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है |  एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतान्त्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था।

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 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई० एन० सी०) ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। इस दिन हर भारतीय अपने देश के लिए प्राण देने वाले प्रत्येक व्यक्ति को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति राष्ट्रीय का नाम का संदेश देते हैं स्कूलों, कॉलेजों आदि मे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते है | 26 जनवरी को हमारे देश की राजधानी दिल्ली में आकर्षक और मन मोह लेने वाले कार्यक्रम होते हैं | देश की राजधानी दिल्ली को इस दिन दुल्हन की तरह सजाया जाता है | गणतंत्र दिवस में आकर्षण का केंद्र दिल्ली मे बड़ी धूम धाम से मनाई जाने वाली परेड होती है | देश के कोने कोने से लोग दिल्ली मे 26 जनवरी की परेड देखने दिल्ली आते है दिल्ली मे बड़ी ही धूम धाम से अस्त्र शस्त्र का प्रदर्शन होता है | 26 जनवरी के दिन राष्ट्रपति की सवारी बड़ी ही धूम धाम से निकाली जाती है और भी बहुत से मन मोहक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है | देश के हर कोने मे जगह जगह 26 जनवरी को मनाया जाता है कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं नृत्य नाटक आदि। 26 जनवरी का यह त्योहार केवल भारत द्वारा ही नहीं मनाया जाता बल्कि दुनिया भर मे निवास कर रहे प्रत्येक भारत वासी द्वारा मनाया जाता है |

क्या आप जानते है 26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है गणतंत्र दिवस क्या है  इसके पीछे का इतिहास और महत्व जानिए - MP24NEWS

इतिहास

भारत का संविधान बनने में पूरे 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे | जिसके बाद 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू किया गया और भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया गया।

अंग्रेजों से वैसे तो हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हो गया था परंतु इस आज़ादी को रूप 26 जनवरी को दिया गया। तब से अब तक हम इस दिवस को आज़ादी के दिन के रूप मे मनाते है आज हमे आज़ादी मिले हुए पूरे 73 साल हो चुके है | हमारे देश की आज़ादी किसी भी एक व्यक्ति के कारण नहीं हुई हमारे देश की आज़ादी बहुत सारे भगत सिंह, महात्मा गांधी आदि जैसे महान पुरूषो के बलिदान का परिणाम है। देश भक्त अपने देश को गुलामी की ज़नज़ीरो से बंधा ना देख सके अपने देश को आज़ाद कराने के लिए उन्होने अपने प्राण तक त्याग दिये उनके बलिदानों के कारण अंग्रेज़ों को अपने घुटने टेकने पड़े और उन्होने भारत को आज़ाद कर दिया। गणतंत्र दिवस के दिन हम इन महान पुरुषों के बलिदान को याद कर प्रेरणा लेते हैं कि हम भी इन्ही महान पुरुषों की तरह अपने देश के लिए अपने प्राण त्याग देंगे, उसकी आन मान और शान की रक्षा के लिए हर समय तैयार रहेंगे और दोबारा कभी अपने देश को गुलामी की जंजीरों में बंधने नहीं देंगे |

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सन् 1929 के दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ | जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को स्वायत्तयोपनिवेश (डोमीनियन) का पद नहीं प्रदान करेगी, जिसके तहत भारत ब्रिटिश साम्राज्य में ही स्वशासित एकाई बन जाने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। इसके पश्चात स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। भारत के स्वतंत्र हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरंभ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे।

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डॉ० भीमराव अम्बेडकरजवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान निर्माण में कुल 22 समितीयाँ थी जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टींग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष विधिवेत्ता डॉ० भीमराव आंबेडकर थे। प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर जी ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया, इसलिए 26 नवंबर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है। संविधान सभा ने संविधान निर्माण के समय कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किये।

इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को यह देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई।  जैसा कि आप सभी जानते है कि 15 Aug 1947 को अपना देश हजारों देशभक्तों के बलिदान के बाद अंग्रेजों की दासता (अंग्रेजों  के शासन) से मुक्त हुआ था। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को अपने देश में भारतीय साशन और कानून व्यवस्था लागू हुई। भाईयो और बहनों ने इस स्वतन्त्रता को पाने में अपने देश की हजारों-हजारों माताओं की गोद सूनी हो गई थी, हजारों बहनों बेटियों के माँग का सिंदूर मिट गया था, तब कहीं इस महान बलिदान के बाद देश स्वतंत्र हो सका था।