परिवर्तन की आवाज, क्या कर पायेगी जनता इस बार सही सरकार का चुनाव, पढ़ें खास रिपोर्ट

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रिपोर्टर- अजहर मलिक

स्थान- काशीपुर

2022 विधानसभा चुनावों के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी है | हर कोई अपनी राजनीतिक विसाद को बिछाने के लिए घोषणाएं और दावों की पोटली बांध कर जनता के बीच फिर से नये सब्जबाग दिखाने की तैयारियों में है, लेकिन पिछले पांच सालों में कितना बदला है जनता का मिजाज यह सिर्फ जनता ही जनता ही जानती है |

हर विधानसभा की अपनी परिस्थितियां है और अपनी अलग ही समस्याएं है, लेकिन सालों से सत्ता में रहने वाली सरकारों ने क्या वास्तव में उन समस्याओं का समाधान किया है, या यूं कहें कि सिर्फ चुनावों में मुद्दे बनकर उभरी बुनियादी सुविधाओं के नारे मंचों तक ही सीमित रह गये या वास्तव में जनता ने जिसको चुनकर अपना प्रतिनिधि बनाया उसने जनता के हितों के लिए धरातल पर कार्य किये है, इसका रियलटी चेक जब काशीपुर विधानसभा में किया गया तो बीस सालों से भाजपा के विधायक रहे हरभजन सिंह चीमा के चुनावी मुद्दे सिर्फ सभाओं तक ही सुनाई दिए लेकिन काशीपुर की जनता को कभी उन समस्याओं से कभी जनता को निजात ही नहीं मिली |

जलभराव सबसे बडी समस्या है जिसको लेकर आज तक कोई समाधान जनप्रतिनिधियों ने नहीं किया | यही वजह है कि बरसात में काशीपुर जलमग्न हो जाता है और जनता त्रस्त | वहीं सड़कें बदहाल है और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बात करें तो डाक्टरों के अभाव में दम तोडता सरकारी अस्पताल | आज भी ये समस्याएं जस की तस बनी है।

 काशीपुर विधानसभा दरअसल कभी कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी लेकिन पिछले बीस सालों से यहां भाजपा का ही कब्जा है, कांग्रेस के कार्यकाल में काशीपुर विधानसभा ने औद्योदिक क्षेत्र के रूप में अपनी एक विशेष पहचान कायम की | लेकिन अब जनसमस्याओं का समाधान अभी नहीं हो पाया | ऐसे में भाजपा के पास तो कोई जवाब नहीं अपने कार्यकाल को लेकर | लेकिन कांग्रेस इस बार जनता के बीच वापस अपनी खोई हुई साख लौटाने के लिए भाजपा को घेरने में कोई कौर कसर नहीं छोड़ रही है। 

वादों और दावों की पोटली लेकर एक बार फिर आपके दरवाजे खटखटाने के लिए वह नेता फिर से तैयार हैं जो पहले भी आपसे कई वादे कर भूल चुके थे, लेकिन चुनावी वर्ष आते ही वह नेता फिर से वोट लेने के लिए चुनावी सभाओं में बडे-बडे वादे लेकर आपके सामने हैं, लेकिन सरकार का फैसला करने वाली जनता इस बार फिर से झूठे वादों में ठगी जाएगीया फिर जागरूक होकर अपना फैसला ईवीएम में दर्ज कर एक योग्य प्रतिनिधित्व के हाथों में कमान सौंपेगी।यह सिर्फ वक्त ही बताएगा |