
स्थान : चमोली
ब्यूरो रिपोर्ट


जनपद के चांई गांव में स्थित पौराणिक धरोहर वेदिका माता सीता मंदिर की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने एक बार फिर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) से इसके शीघ्र जीर्णोद्धार की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है और अब इसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाने जरूरी हैं।


चांई गांव के ग्राम प्रधान शंकर लाल ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि गांव की आराध्य देवी सीता माता के पौराणिक मंदिर के जीर्णोद्धार को प्राथमिकता दी जाए। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द होने वाली बीकेटीसी की बोर्ड बैठक में मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।



ग्राम प्रधान शंकर लाल का कहना है कि मंदिर की स्थिति लगातार खराब होने के कारण सीता माता को वर्षों से उनके मूल मंदिर में स्थापित नहीं किया जा सका है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक आराध्य देवी को अपना मूल स्थान छोड़कर दूसरे भवन में विराजमान रहना पड़ेगा। मंदिर के पुनर्निर्माण और संरक्षण को लेकर ग्रामीण लंबे समय से मांग उठा रहे हैं।



बताया गया कि सीता माता का यह पौराणिक मंदिर बीकेटीसी के अधीन है। मंदिर में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी भी मंदिर समिति के पुजारी निभाते हैं और सीता माता की नित्य दैनिक पूजा परंपरागत रूप से संपन्न की जाती है। मंदिर की वर्तमान स्थिति को देखते हुए पूजा व्यवस्था को अस्थायी रूप से दूसरे स्थान पर संचालित किया जा रहा है।



मंदिर भवन की दयनीय स्थिति के कारण पिछले कुछ वर्षों से सीता माता को समीप के एक अन्य भवन में स्थापित किया गया है। वहीं पर वर्तमान में नियमित पूजा-अर्चना की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थायी तौर पर की गई थी, लेकिन काफी समय बीतने के बावजूद मूल मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर केवल उनकी धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में मंदिर की लगातार बिगड़ती स्थिति से स्थानीय लोगों में चिंता है। ग्रामीण चाहते हैं कि इसकी प्राचीनता और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए जीर्णोद्धार का कार्य जल्द शुरू किया जाए।




ग्राम प्रधान शंकर लाल ने कहा कि ग्रामीणों को बीकेटीसी की आगामी बोर्ड बैठक से काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने मांग की कि बैठक में सीता माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव पर ठोस निर्णय लेते हुए आवश्यक बजट और कार्ययोजना निर्धारित की जाए, जिससे वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान हो सके।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगामी बोर्ड बैठक में भी मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में ग्रामीण बीकेटीसी के जोशीमठ स्थित नरसिंह मंदिर कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
अब चांई गांव के ग्रामीणों की निगाहें बीकेटीसी की आगामी बोर्ड बैठक पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि समिति उनकी वर्षों पुरानी मांग पर सकारात्मक फैसला लेते हुए पौराणिक सीता माता मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में जल्द कदम उठाएगी, जिससे आराध्य देवी को पुनः उनके मूल मंदिर में स्थापित किया जा सके।

