खनन की 28 करोड़ की धनराशि के खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

खनन की 28 करोड़ की धनराशि के खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

स्थान : बागेश्वर
ब्यूरो रिपोर्ट

खनन से प्राप्त धनराशि के खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग को लेकर कांग्रेस के समर्थन में चल रहा बसंत कुमार का आंदोलन अब प्रशासन की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। प्रदर्शनकारी लगातार जिला खनिज न्यास की करीब 28 करोड़ रुपये की धनराशि के खर्च में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे मामले को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।

खनन कारोबारी और आंदोलनकारी बसंत कुमार का कहना है कि खनन से प्राप्त करोड़ों रुपये की धनराशि जनहित और विकास कार्यों पर खर्च की जानी है। ऐसे में इस रकम का किस मद में और किन योजनाओं पर खर्च किया गया, इसका पूरा विवरण जनता के सामने रखा जाना चाहिए।

बसंत कुमार लगातार जिला प्रशासन से खनन की धनराशि के खर्च का सार्वजनिक हिसाब मांग रहे हैं। उनका आरोप है कि करीब 28 करोड़ रुपये की राशि के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं और इनका स्पष्ट जवाब प्रशासन को देना चाहिए।

आंदोलन को कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारी की मांग का समर्थन करते हुए खनन से प्राप्त धनराशि के उपयोग में पारदर्शिता बरतने और जनता को पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।

इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल बागेश्वर प्रशासन की ओर से सामने नहीं आए विस्तृत सार्वजनिक जवाब को लेकर उठ रहा है। प्रदर्शनकारी लगातार आरोप लगा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आंदोलनकारी का कहना है कि यदि जिला खनिज न्यास की धनराशि के खर्च में सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो प्रशासन को इसका पूरा विवरण सार्वजनिक करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि पारदर्शिता से ही इन आरोपों और सवालों का समाधान संभव है।

मामले को लेकर जिलाधिकारी बागेश्वर अपूर्वा पांडे की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों और धनराशि के उपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल खनन की करीब 28 करोड़ रुपये की धनराशि के खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करता है और प्रदर्शनकारी की ओर से लगाए जा रहे कथित अनियमितताओं के आरोपों पर क्या स्थिति स्पष्ट होती है।