
स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट


हरिद्वार जिला कलेक्ट्रेट में साप्ताहिक जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्र ने जनपदवासियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए।


जनसुनवाई के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़ी कुल 44 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 26 शिकायतों का अधिकारियों ने मौके पर ही निस्तारण कर दिया, जबकि शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को भेजते हुए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।


जनसुनवाई में राजस्व और भूमि विवाद से संबंधित मामलों के साथ विद्युत, अतिक्रमण, जलभराव, पेयजल और राशन कार्ड से जुड़ी समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आईं। फरियादियों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों के समक्ष शिकायतें रखीं।


कई लोगों ने जल निकासी की समस्या को लेकर शिकायत की। वहीं कुछ फरियादियों ने मकान निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग की। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।


जनसुनवाई में सौर ऊर्जा संयंत्र से जुड़े लोन और ब्याज माफी का मामला भी सामने आया। फरियादियों ने आर्थिक समस्या का हवाला देते हुए संबंधित प्रकरण में राहत दिलाने की मांग जिलाधिकारी के समक्ष रखी।

इसके अलावा एक फरियादी ने अवैध शराब की दुकान बंद कराने की मांग की। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को शिकायत की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।


जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों को प्राथमिकता और संवेदनशीलता के साथ लिया जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और प्रत्येक प्रकरण पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


जनसुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों की भी समीक्षा की गई। समीक्षा में 36 दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि आम जनता की समस्याओं का समाधान प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने लंबित मामलों की नियमित निगरानी करने और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि जनसुनवाई व्यवस्था का लाभ लोगों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।

