स्थान : द्वाराहाट
रिपोर्टर : संजय जोशी


उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता और राज्य आंदोलन के प्रमुख चिंतक स्वर्गीय विपिन चंद्र त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर उनके गृहक्षेत्र द्वाराहाट में श्रद्धांजलि सभा और विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।


कार्यक्रम के तहत घटघाड़ तिराहे से त्रिमूर्ति चौक तक विशाल रैली निकाली गई। रैली में युवाओं ने “जय पहाड़, जय पहाड़ी” और “राजधानी गैरसैंण” के नारे लगाते हुए उत्तराखंड के मूल मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।



रैली में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से सैकड़ों पूर्व सैनिक, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए। लोगों ने स्वर्गीय विपिन चंद्र त्रिपाठी के संघर्ष को याद करते हुए उनके विचारों और उत्तराखंड के विकास को लेकर उनकी परिकल्पना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय विपिन चंद्र त्रिपाठी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस दौरान मौजूद लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उनके योगदान को याद किया।


जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विपिन चंद्र त्रिपाठी का सपना केवल उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने तक सीमित नहीं था। वे पहाड़ में रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास के पक्षधर थे।

वक्ताओं ने कहा कि त्रिपाठी उत्तराखंड से पलायन रोकने और जल, जंगल तथा जमीन पर स्थानीय लोगों के अधिकार की मजबूत पैरवी करते थे। उनका मानना था कि राज्य के संसाधनों का लाभ सबसे पहले यहां के स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए।




जनसभा में वक्ताओं ने राज्य गठन के वर्षों बाद भी पहाड़ की चुनौतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज भी पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन, बेरोजगारी और स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है।
वक्ताओं ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के दौरान जिन भावनाओं और उद्देश्यों को लेकर लोगों ने संघर्ष किया था, उन पर सरकार और राजनीतिक दलों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।


पुण्यतिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्वर्गीय विपिन चंद्र त्रिपाठी के विचारों और संघर्ष को याद करते हुए उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, पलायन रोकने और स्थानीय हितों की रक्षा के लिए आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया गया।

