बीड़ी-सिगरेट छुड़ाने के लिए हर्बल बीड़ी का सहारा, ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज में नई पहल

बीड़ी-सिगरेट छुड़ाने के लिए हर्बल बीड़ी का सहारा, ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज में नई पहल

स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

दुनिया में नशा एक बड़ी सामाजिक बुराई बन चुका है। धूम्रपान के दुष्प्रभावों के चलते लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी को देखते हुए धूम्रपान की लत छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज के अगदतंत्र विभाग ने एक नई पहल शुरू की है।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, आयुर्वेदाचार्यों और शोधार्थियों ने निकोटीन मुक्त औषधीय धूम्रपान दंडिका तैयार की है, जिसे हर्बल बीड़ी या हर्बल स्मोकिंग स्टिक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य धूम्रपान छोड़ने की प्रक्रिया में लोगों की मदद करना है।

चिकित्सकों के अनुसार हर्बल धूम्रपान दंडिका के माध्यम से धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक तलब को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके जरिए धीरे-धीरे तंबाकू और निकोटीन से दूरी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इस पहल की खास बात यह है कि धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों को अचानक बीड़ी या सिगरेट बंद करने के बजाय एक वैकल्पिक धूम्रपान दंडिका का इस्तेमाल कराया जा रहा है। हालांकि, इसका प्रयोग चिकित्सकीय निगरानी में किया जा रहा है, ताकि मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके।

ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज के अगदतंत्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भावना मित्तल ने बताया कि धूम्रपान की आदत छोड़ना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयुर्वेदिक औषधियों से यह धूम्रपान दंडिका तैयार की गई है।

उन्होंने बताया कि हर्बल स्मोकिंग स्टिक में तंबाकू और निकोटीन के स्थान पर आयुर्वेदिक औषधियों का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को धीरे-धीरे पारंपरिक तंबाकू उत्पादों से दूर करने की दिशा में मदद करना है।

डॉ. भावना मित्तल के अनुसार इस पहल के तहत मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में हर्बल धूम्रपान दंडिका का इस्तेमाल कराया जा रहा है। उपचार के दौरान मरीजों की स्थिति और प्रतिक्रिया पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि जरूरत के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय की जा सके।

आयुर्वेद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, चिकित्सकों और शोधार्थियों की इस पहल को धूम्रपान की लत से जूझ रहे लोगों के लिए एक वैकल्पिक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान छोड़ने की प्रक्रिया में इच्छाशक्ति और चिकित्सकीय मार्गदर्शन दोनों महत्वपूर्ण हैं।

ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य लोगों को तंबाकू और निकोटीन की लत से धीरे-धीरे बाहर निकालना है। कॉलेज प्रशासन और चिकित्सकीय टीम इस पहल के जरिए धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों को सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है।