फूलों की घाटी में दुर्लभ फूलों के लिए खतरा बना पॉलीगोनम, 18 साल से उन्मूलन में जुटा पार्क प्रशासन

फूलों की घाटी में दुर्लभ फूलों के लिए खतरा बना पॉलीगोनम, 18 साल से उन्मूलन में जुटा पार्क प्रशासन

स्थान : चमोली
ब्यूरो रिपोर्ट

चमोली जिले की उच्च हिमालयी भ्यूंडार घाटी में स्थित यूनेस्को की विश्व प्राकृतिक धरोहर फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान इन दिनों एक गंभीर प्राकृतिक चुनौती से जूझ रहा है। यहां तेजी से फैल रहा पॉलीगोनम नामक झाड़ीनुमा खरपतवार आसपास मौजूद दुर्लभ हिमालयी पुष्पों के लिए खतरा बनता जा रहा है।

पॉलीगोनम पिछले करीब दो दशकों से फूलों की घाटी में लगातार अपना दायरा बढ़ा रहा है। इसकी तेजी से फैलने की प्रवृत्ति के कारण घाटी के बड़े हिस्से में इसका कब्जा बताया जा रहा है। वर्तमान में यह घाटी के करीब आधे क्षेत्र में फैल चुका है, जिससे पार्क प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि पॉलीगोनम की ऊंचाई इन दिनों करीब डेढ़ से दो मीटर तक पहुंच रही है। इसके आसपास की अन्य वनस्पतियों को दबाने और खत्म करने की प्रवृत्ति के कारण घाटी में पाए जाने वाले दुर्लभ हिमालयी फूलों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा सकता है।

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन पिछले करीब 18 वर्षों से इस खरपतवार के उन्मूलन के प्रयास कर रहा है। हर वर्ष पॉलीगोनम को हटाने का अभियान चलाया जाता है, लेकिन इसके तेजी से दोबारा फैलने के कारण अभी तक इसका पूरी तरह उन्मूलन नहीं हो सका है।

इस वर्ष भी पार्क प्रशासन ने पॉलीगोनम के खिलाफ चरणबद्ध तरीके से अभियान शुरू किया है। इसके लिए ‘पॉलीगोनम रिमूविंग प्लान’ तैयार कर विभिन्न कंपार्टमेंट में इसे उखाड़ने और हटाने का काम किया जा रहा है। विभाग की कोशिश है कि इसके विस्तार को किसी तरह नियंत्रित किया जा सके।

वर्तमान में फूलों की घाटी रंग-बिरंगे दुर्लभ पुष्पों से लकदक है और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को लगातार आकर्षित कर रही है। इस वर्ष एक जून को घाटी के पर्यटकों के लिए खुलने के बाद से बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी यहां पहुंच रहे हैं।

हालांकि फूलों की रंगीन छटा के बीच पॉलीगोनम का तेजी से फैलाव पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। घाटी की यात्रा से लौटे पर्यटकों के अनुसार द्वारी पुल से बामन धोड़, सूचन्द कंपार्टमेंट, पुष्पगंगा से आगे प्रियदर्शनी प्वाइंट तक पॉलीगोनम कई स्थानों पर फैला हुआ दिखाई दे रहा है।

स्थानीय स्तर पर इसे अमेला या नटग्रास के नाम से भी जाना जाता है। पर्यटकों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते इसके प्रसार पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में यह पूरी घाटी में फैल सकता है और यहां की प्राकृतिक जैव विविधता को प्रभावित कर सकता है।

फूलों की घाटी के रेंज ऑफिसर आशीष जिरवाण ने बताया कि पॉलीगोनम के फैलाव को रोकने के प्रयास लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि इसके समूल नाश के लिए विभाग द्वारा चरणबद्ध तरीके से पॉलीगोनम रिमूविंग प्लान के तहत विभिन्न कंपार्टमेंट में कटान और उन्मूलन का कार्य किया जा रहा है। पार्क प्रशासन का प्रयास है कि दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों को इस खरपतवार के प्रभाव से सुरक्षित रखा जा सके।