बहू बनी ‘आधुनिक श्रवण कुमार’, सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से हापुड़ तक पैदल यात्रा

बहू बनी ‘आधुनिक श्रवण कुमार’, सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से हापुड़ तक पैदल यात्रा

स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

कांवड़ यात्रा के पावन अवसर पर हरिद्वार में रिश्तों, संस्कारों और सेवा भाव की अनोखी मिसाल देखने को मिली। एक बहू ने अपनी वृद्ध सास की वर्षों पुरानी गंगा स्नान और कांवड़ यात्रा की इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से हापुड़ तक पैदल यात्रा शुरू की है।

इस अनोखी यात्रा ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बहू द्वारा सास की सेवा और आस्था के प्रति समर्पण को देखकर रास्ते में लोग उन्हें सम्मान दे रहे हैं और ‘आधुनिक श्रवण कुमार’ की संज्ञा दे रहे हैं।

यात्रा में खास बात यह भी है कि परिवार की नन्ही पोती भी अपनी दादी की सेवा में पूरी श्रद्धा के साथ साथ चल रही है। मासूम बच्ची का यह भाव भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि आज के दौर में जहां कई बार पारिवारिक रिश्तों में दूरी देखने को मिलती है, वहीं यह परिवार सेवा, समर्पण और संस्कारों की प्रेरणादायक तस्वीर पेश कर रहा है।

बहू ने बताया कि उनकी सास लंबे समय से गंगा स्नान और कांवड़ यात्रा करने की इच्छा रखती थीं। इसी इच्छा को पूरा करने के उद्देश्य से उन्होंने सास को कांवड़ में बैठाकर यह कठिन यात्रा करने का संकल्प लिया।

पूरे यात्रा मार्ग में श्रद्धालु इस परिवार के सेवा भाव और आस्था की सराहना करते नजर आ रहे हैं। लोग इस अनोखी कांवड़ यात्रा को रिश्तों की मजबूती और भारतीय संस्कारों का उदाहरण बता रहे हैं।

कांवड़ यात्रा के बीच सामने आई यह तस्वीर मानवता, पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का संदेश दे रही है, जो श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।