महिला आयोग की भूमिका, चुनौतियों और संभावनाओं पर मुक्त विश्वविद्यालय में कार्यशाला आयोजित

महिला आयोग की भूमिका, चुनौतियों और संभावनाओं पर मुक्त विश्वविद्यालय में कार्यशाला आयोजित

स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में महिला अध्ययन केंद्र एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “महिला आयोग : भूमिका, चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। सीडीएस जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय भवन में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों और शोधार्थियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के निदेशक अकादमिक प्रोफेसर पी.डी. पंत ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक समावेशी और न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय महिला अधिकारों और लैंगिक समानता जैसे विषयों पर निरंतर संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।

कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए समाज विज्ञान विद्याशाखा एवं महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रोफेसर रेनू प्रकाश ने कहा कि महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, उन्हें न्याय दिलाने और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बदलते सामाजिक परिवेश में महिला आयोग की बढ़ती जिम्मेदारियों पर भी प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता डॉ. पलक मित्तल, राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिला आयोग की संवैधानिक एवं वैधानिक भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, बाल विवाह और महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी देते हुए कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर उपलब्ध कानूनी व्यवस्थाओं का प्रभावी उपयोग करना चाहिए।

मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल ने कहा कि राज्य महिला आयोग महिलाओं की समस्याओं के समाधान और उन्हें न्याय दिलाने के लिए पिछले 23 वर्षों से लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं तक आयोग की पहुंच बढ़ाने, जागरूकता अभियान चलाने तथा शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों से महिला अध्ययन, लैंगिक समानता और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर शोध एवं कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के सह-संयोजक एवं शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के निदेशक प्रोफेसर डिगर सिंह फर्सवान ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा और समानता के विषय पर परिवार और समाज स्तर पर भी गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नागेन्द्र गंगोला ने किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न निदेशक, प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी, महिला आयोग के अधिकारी और विश्वविद्यालय परिवार के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। कार्यशाला में महिला अधिकारों, सामाजिक बदलाव और लैंगिक समानता को लेकर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श किया गया।