महिलाओं के अधिकारों और पॉश अधिनियम पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

महिलाओं के अधिकारों और पॉश अधिनियम पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

स्थान : रुद्रपुर
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के तत्वावधान में विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर नारायण इंडस्ट्रीज ग्लोबल, रुद्रपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम जनपद न्यायाधीश सिकंद कुमार त्यागी के निर्देशन में आयोजित हुआ, जिसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ऊधम सिंह नगर की सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ममता पंत ने महिलाओं के अधिकारों, जनसंख्या स्थिरीकरण और पॉश अधिनियम-2013 की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल जज ममता पंत ने कहा कि प्रत्येक महिला को सम्मानजनक और सुरक्षित कार्यस्थल पर कार्य करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013 (POSH Act) के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न, अभद्र व्यवहार, अशोभनीय इशारों या अनुचित आचरण की स्थिति में महिला कर्मचारी बिना किसी भय या संकोच के पॉश समिति के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए कहा कि महिलाओं को अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए, ताकि वे किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ प्रभावी ढंग से आवाज उठा सकें। साथ ही विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर जनसंख्या स्थिरीकरण के सामाजिक एवं आर्थिक लाभों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम में पराविधिक स्वयंसेवक मोहम्मद शहीद ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ऊधम सिंह नगर द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जरूरतमंद नागरिक नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 के माध्यम से भी कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

सचिव ममता पंत ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के अधिकारों, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण, जनसंख्या स्थिरीकरण के महत्व के साथ-साथ आगामी 18 जुलाई से आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्होंने लोगों से चेक बाउंस से संबंधित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष लोक अदालत का लाभ उठाने की अपील की।

कार्यक्रम में उपस्थित कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों ने महिलाओं की सुरक्षा, कानूनी अधिकारों और विधिक सेवाओं से जुड़ी जानकारी को उपयोगी बताते हुए ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।