बाजपुर नगर पालिका कर्मियों का आंदोलन तेज, नियमितीकरण और समान वेतन की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू

बाजपुर नगर पालिका कर्मियों का आंदोलन तेज, नियमितीकरण और समान वेतन की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू

स्थान : बाज़पुर
रिपोर्टर : विशेष शर्मा

नगर पालिका बाजपुर के दैनिक वेतन भोगी और संविदा कर्मकारों का आंदोलन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। नियमितीकरण और समान कार्य समान वेतन की मांग को लेकर 27 जून 2026 से नगर पालिका परिसर में चल रहा क्रमिक अनशन शुक्रवार को आमरण अनशन में बदल गया।

उत्तराखंड निकाय कर्मचारी महासंघ के शाखा अध्यक्ष सीताराम तिवारी ने 10 जुलाई 2026 से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से मांगों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

कर्मचारियों के आंदोलन के चलते नगर पालिका की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। सफाई कार्य बंद होने से शहर के कई स्थानों पर कूड़ा जमा होने लगा है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि नगर पालिका बाजपुर में पिछले करीब 36 वर्षों से दैनिक वेतन भोगी और संविदा कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उनका नियमितीकरण नहीं किया गया। कई कर्मचारी स्थायी होने की उम्मीद में सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि कुछ कर्मचारियों की इसी इंतजार में मृत्यु भी हो चुकी है।

वर्तमान में नगर पालिका में करीब 28 पर्यावरण मित्र और अन्य कर्मचारी संविदा एवं दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्यरत हैं। कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग उठा रहे हैं।

शुक्रवार को नगर पालिका अध्यक्ष गुरजीत सिंह गिट्टे ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनरत कर्मचारियों से वार्ता की। उन्होंने कर्मचारियों से आमरण अनशन और कलम बंद हड़ताल को एक सप्ताह के लिए स्थगित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर विभागीय मंत्री और अधिकारियों से वार्ता कर समाधान का प्रयास किया जाएगा।

वहीं कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें इससे पहले भी कई बार आश्वासन मिल चुके हैं, लेकिन मांगों पर कोई निर्णय नहीं हुआ। अब कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं और मांगें पूरी होने तक आमरण अनशन समाप्त नहीं करेंगे।

धरना स्थल पर बाजपुर तहसीलदार और नगर पालिका के प्रभारी अधिशासी अधिकारी भी पहुंचे और कर्मचारियों से आंदोलन स्थगित करने का आग्रह किया, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

अब सभी की नजरें विभागीय अधिकारियों और शहरी विकास विभाग पर टिकी हैं कि कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग पर सरकार कब तक कोई ठोस निर्णय लेती है।