

स्थान : ऋषिकेश
ब्यूरो रिपोर्ट

रेलवे रोड स्थित भगवान आश्रम में भैरव सेना संगठन (देवभूमि भैरव वाहिनी) की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें उत्तराखंड के पौराणिक तीर्थ स्थलों की मर्यादा, हक-हकूकधारियों के अधिकारों तथा कॉर्पोरेट पर्यटन के बढ़ते प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।


बैठक में वक्ताओं ने कहा कि तीर्थ स्थलों की पारंपरिक व्यवस्थाओं में लगातार बदलाव हो रहा है, जिससे स्थानीय हक-हकूकधारियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉर्पोरेट पर्यटन के बढ़ते प्रभाव से तीर्थों की मूल सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान पर भी असर पड़ रहा है।



संगठन के पदाधिकारियों ने बीकेटीसी (बदरी-केदार मंदिर समिति) के प्रस्तावित बोर्ड गठन और धर्मस्व विभाग को पर्यटन विभाग में मिलाने के निर्णय का विरोध किया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे निर्णयों से तीर्थ स्थलों की परंपरागत व्यवस्था कमजोर हो सकती है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक में तीर्थ क्षेत्रों में कथित अवैध व्यावसायिक घुसपैठ को रोकने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। इसके साथ ही तीर्थ सुधार विधान नियमावली-1924 को प्रभावी रूप से लागू करने तथा आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा के अनुसार यात्रा संचालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने कहा कि तीर्थों की पवित्रता और पारंपरिक व्यवस्थाओं की रक्षा के लिए संगठन लगातार आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो राज्यव्यापी जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन तीर्थ स्थलों की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक मर्यादा और स्थानीय हक-हकूकधारियों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से होगा। बैठक में मौजूद सदस्यों ने भी एकजुट होकर इन मुद्दों पर संघर्ष करने का संकल्प लिया।



