ब्यूरो रिपोर्ट


लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। इसी बीच प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि आने वाले समय में पार्टी में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है।


राजभर ने कहा कि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की राजनीति की चर्चा छोड़ दीजिए, समाजवादी पार्टी के कई नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के लिए तैयार बैठे हैं। उनका दावा है कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


उन्होंने समाजवादी पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि जैसे-जैसे विभिन्न मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कुछ नेताओं की बेचैनी भी बढ़ती जा रही है। राजभर ने खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट परियोजना जैसे पुराने मामलों का भी उल्लेख किया।


हालांकि अपने दावे के समर्थन में उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया और न ही किसी संभावित दल-बदल को लेकर कोई ठोस जानकारी साझा की। इसके बावजूद उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है।

राजभर ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव का भी जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा था। हालांकि उन्होंने इस संदर्भ में विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी।

वहीं समाजवादी पार्टी ने राजभर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता सुनील साजन ने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी दल बौखलाहट में इस प्रकार के बयान दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजभर केवल राजनीतिक चर्चा में बने रहने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं।



सुनील साजन ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचाया था और 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी मजबूत प्रदर्शन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राजभर की पार्टी का कोई विधायक जीतकर नहीं आएगा।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में ओम प्रकाश राजभर और अखिलेश यादव के बीच लगातार तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। राजभर ने हाल ही में अखिलेश यादव के विदेश दौरे को लेकर भी टिप्पणी की थी और उन्हें उत्तर प्रदेश के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने की सलाह दी थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव नजदीक आने के साथ ही प्रदेश में ऐसी बयानबाजी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप आगे भी तेज हो सकते हैं।


