स्थान :हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट


संवैधानिक अधिकार संघर्ष समिति, हल्द्वानी के बैनर तले विभिन्न संगठनों ने रामलीला मैदान में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ के विरोध में महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा। ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी हल्द्वानी के माध्यम से प्रेषित किया गया। समिति ने मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


वक्ताओं ने कहा कि 8 अगस्त 2026 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था। उन्होंने बताया कि खड़गे दलित समाज से आते हैं और उनके संबोधन के दो दिन बाद मैदान में कथित तौर पर गंगाजल का छिड़काव, धुलाई और हवन किया गया।


समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि 10 अगस्त को सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ लोगों द्वारा रामलीला मैदान में किया गया कथित ‘शुद्धिकरण’ सामाजिक और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इसे दलित समाज, सभा में मौजूद SC, ST, OBC एवं मूलनिवासी समाज और संविधान की मूल भावना का अपमान बताया।

ज्ञापन में समिति की ओर से दावा किया गया कि उक्त घटना संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 17 और 21 की भावना के विपरीत है। साथ ही समिति ने इसे अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की संबंधित धाराओं के तहत जांच योग्य मामला बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की।

समिति ने पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराने की मांग की। वक्ताओं का कहना था कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

ज्ञापन में वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर घटना में शामिल लोगों की पहचान करने की मांग की गई। समिति ने मांग की कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित कानूनों के तहत प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।



समिति ने उत्तराखंड सरकार से भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक और सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी की। वक्ताओं ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकार और सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में समिति से जुड़े दीपक चनियाल, मुकेश बौद्ध, आरपी गंगोला, जीआर आर्य, राधा आर्य, शेखावत हुसैन, आफताब आलम, महेश चंद्र आर्य, जीआर टम्टा, पीआर टम्टा, बीएल, नफीस अहमद खान, गोपाल गैसिकोटी, नरेंद्र, आरपी चनियाल, बच्ची लाल, आरआर आर्य, सोहन लाल, पंकज अम्बेडकर, मोहन गासिकोटी, जीतराम और गंगा प्रसाद समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

समिति ने कहा कि ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मामले का संज्ञान लेकर संबंधित संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। अब इस मामले में प्रशासन और सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

