घने कोहरे और बारिश के बीच SDRF ने 15 सदस्यीय ट्रैकिंग दल का किया सफल रेस्क्यू

घने कोहरे और बारिश के बीच SDRF ने 15 सदस्यीय ट्रैकिंग दल का किया सफल रेस्क्यू

स्थान : चमोली (बद्रीनाथ)
ब्यरो रिपोर्ट

बद्रीनाथ उत्तराखंड एसडीआरएफ ने एक बार फिर कठिन परिस्थितियों में अपनी दक्षता और समर्पण का परिचय देते हुए 15 सदस्यीय ट्रैकिंग दल का सफल रेस्क्यू किया। घने कोहरे, अंधेरे और लगातार हो रही बारिश के बीच यह अभियान चलाया गया, जिसमें सभी ट्रैकर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

जानकारी के अनुसार, जोशीमठ स्थित ड्रोन एडवेंचर ट्रैकिंग कंपनी के संचालक नरेंद्र सिंह रावत अपने 15 सदस्यीय दल के साथ गुरुवार को घमसाली से बद्रीनाथ की ओर ट्रैकिंग के लिए निकले थे। ट्रैकिंग के दौरान दल मुछुकुंद गुफा के ऊपरी पर्वतीय क्षेत्र में स्थित “मूसा पानी” के पास सरस्वती नदी पार करते समय खराब मौसम के कारण रास्ता भटक गया।

घने कोहरे और अंधेरे के बीच फंसे ट्रैकर्स टॉर्च की रोशनी और आवाज के जरिए मदद की गुहार लगा रहे थे। इसी दौरान क्षेत्र में गश्त कर रहे आईटीबीपी जवानों की नजर उन पर पड़ी। आईटीबीपी ने तत्काल इसकी सूचना थाना बद्रीनाथ को दी, जिसके बाद एसडीआरएफ को रेस्क्यू के लिए अलर्ट किया गया।

सूचना मिलते ही एडीएसआई दीपक मेहता के नेतृत्व में एसडीआरएफ की टीम आवश्यक उपकरणों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुई। खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बावजूद टीम ने ट्रैकर्स की लोकेशन का पता लगाने का प्रयास शुरू किया।

काफी मशक्कत के बाद सरस्वती नदी के पार कोहरे के बीच ट्रैकर्स की गतिविधियां दिखाई दीं। एसडीआरएफ जवानों ने सीटी, टॉर्च और आवाज के माध्यम से संपर्क स्थापित किया तथा सुरक्षित मार्ग तलाशते हुए करीब डेढ़ घंटे की कठिन मेहनत के बाद दल तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

रेस्क्यू टीम ने ट्रैकर्स का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें सुरक्षित होने का भरोसा दिलाया। इसके बाद एसडीआरएफ और आईटीबीपी की संयुक्त टीम ने सभी ट्रैकर्स को सुरक्षित निकालकर माना गांव की ओर रवाना किया।

रेस्क्यू अभियान के दौरान दल में शामिल 75 वर्षीय बुजुर्ग उदय प्रांजल को चलने में काफी परेशानी हो रही थी। एसडीआरएफ जवानों ने पूरे रास्ते उन्हें विशेष सहायता प्रदान की और सुरक्षित रूप से पैदल निकालकर माना तक पहुंचाया।

सफल अभियान के बाद ट्रैकिंग दल के लीडर नरेंद्र सिंह रावत ने एसडीआरएफ और आईटीबीपी की त्वरित कार्रवाई, साहस और मानवीय सेवा भावना की सराहना करते हुए पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उत्तराखंड एसडीआरएफ ने एक बार फिर साबित किया कि विपरीत मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में भी वह जनसेवा और मानव जीवन की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।