फीफा विश्व कप से पहले बड़ा विवाद, सोमाली रेफरी उमर आर्तन को अमेरिका में नहीं मिली एंट्री

फीफा विश्व कप से पहले बड़ा विवाद, सोमाली रेफरी उमर आर्तन को अमेरिका में नहीं मिली एंट्री

ब्यरो रेपोर्ट

फीफा विश्व कप 2026 से पहले एक बड़ा विवाद सामने आया है। सोमालिया के अंतरराष्ट्रीय रेफरी उमर अब्दुल कादिर आर्तन को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद उन्हें विश्व कप के लिए नियुक्त अधिकारियों की सूची से हटा दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब टूर्नामेंट की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

उमर आर्तन को वर्ष 2025 के लिए अफ्रीकी फुटबॉल परिसंघ द्वारा पुरुष वर्ग का सर्वश्रेष्ठ रेफरी चुना गया था। वह विश्व कप 2026 के लिए घोषित 52 रेफरियों में शामिल थे। हालांकि मियामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उन्हें अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली और बाद में उन्हें वापस लौटना पड़ा। फिलहाल वह तुर्की में हैं।

अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों ने एंट्री से इनकार करने का कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सोमालिया उन देशों में शामिल है, जिनके नागरिकों पर अमेरिकी प्रशासन द्वारा यात्रा संबंधी कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए हसन अली खैरे ने गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उमर आर्तन अफ्रीका के सर्वश्रेष्ठ और दुनिया के प्रमुख रेफरियों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और ईमानदारी के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मामले का कोई समाधान निकलेगा।

उमर आर्तन ने भी एक बयान जारी कर कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, वह सकारात्मक बने हुए हैं और अपने रेफरी करियर की अगली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने फीफा और सीएएफ का समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प जताया।

दूसरी ओर फीफा ने स्पष्ट किया कि मेजबान देशों की वीजा और इमिग्रेशन प्रक्रिया पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होता। फीफा ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने सूचित किया है कि फिलहाल उमर आर्तन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा और इसलिए वह विश्व कप में अपनी भूमिका नहीं निभा सकेंगे।

गौरतलब है कि फीफा विश्व कप 2026 का आयोजन संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में 11 जून से 19 जुलाई तक होगा। सोमाली फुटबॉल महासंघ ने इस मामले में स्पष्टीकरण मांगते हुए फीफा से संपर्क किया है। खेल जगत में इस फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है और कई लोग इसे खेल और राजनीति के टकराव के रूप में देख रहे हैं।