

स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट


रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सोमवार दोपहर 12:45 बजे विधि-विधान के साथ आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। भगवान शिव के एकानन स्वरूप चतुर्थ केदार के दर्शन के लिए अब श्रद्धालु पवित्र धाम पहुंच सकेंगे।


समुद्र तल से लगभग 11,808 फीट की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ धाम अपनी अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा, प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यमयी दिव्यता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। मध्य हिमालय की दुर्गम चोटियों और मखमली बुग्यालों के बीच स्थित यह धाम श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।


रुद्रनाथ धाम पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सगर गांव और गंगोल गांव से लगभग 19 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यात्रा मार्ग केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के संरक्षित बफर जोन से होकर गुजरता है।


केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के रेंज ऑफिसर भरत सिंह नेगी ने बताया कि सीमित व्यवस्थाओं और उच्च हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए अब प्रतिदिन केवल 250 श्रद्धालुओं को ही रुद्रनाथ धाम यात्रा की अनुमति दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान मौसम में अचानक बदलाव, अतिवृष्टि और ओलावृष्टि जैसी परिस्थितियों का खतरा बना रहता है। इसलिए श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

वन विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार दोपहर 2 बजे के बाद रुद्रनाथ धाम यात्रा के लिए किसी भी यात्री को अनुमति नहीं दी जाएगी। यात्रियों को दोपहर दो बजे से पहले ही यात्रा मार्ग पर निकलना अनिवार्य होगा।


वन विभाग ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे पूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही यात्रा पर आएं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी और कठिन मार्ग को देखते हुए स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बेहद जरूरी हैं।
रुद्रनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी हरीश भट्ट ने श्रद्धालुओं से रुद्र हिमालय क्षेत्र की पवित्रता, स्वच्छता और धाम की गरिमा बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है।
वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि संरक्षित क्षेत्र में प्रवेश शुल्क को लेकर फैली भ्रांतियां गलत हैं। 23 सितंबर 2023 के शासनादेश के तहत संरक्षित क्षेत्र में भ्रमण हेतु निर्धारित प्रवेश शुल्क लिया जाता है, जिसे सुविधा शुल्क नहीं माना जाएगा।
चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम में भगवान शिव के मुख के दर्शन होते हैं। यहां बाबा प्राकृतिक गुफा में विराजमान हैं, जिसे मंदिर का स्वरूप दिया गया है। कठिन और दुर्गम यात्रा के बावजूद हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा रुद्रनाथ के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

