

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट


भुवन चंद्र खंडूरी की अंतिम विदाई के दौरान हर आंख नम नजर आई। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व सैनिक रहे खंडूरी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।


अंतिम दर्शन के दौरान लोगों ने उन्हें एक सख्त अनुशासनप्रिय, ईमानदार और देशभक्त नेता के रूप में याद किया। उनके साथ बिताए गए पलों को साझा करते हुए कई लोगों की आंखें भावुक हो उठीं।


इस दौरान सेना से सेवानिवृत्त कर्नल वीरेंद्र बिष्ट ने भी स्वर्गीय खंडूरी के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 1970 से 1974 तक उन्हें मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी के साथ कार्य करने का अवसर मिला।


कर्नल वीरेंद्र बिष्ट ने कहा कि वर्ष 1971 में वे खंडूरी साहब के अधीन कार्यरत रहे, जबकि 1973 में उन्हें उनके स्टाफ ऑफिसर के रूप में काम करने का मौका मिला। इस दौरान उन्होंने खंडूरी के व्यक्तित्व और कार्यशैली को बेहद करीब से देखा।
उन्होंने बताया कि जब भुवन चंद खंडूरी सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर थे, तब भी उनका व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली था। वे अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते थे और अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते थे।

सेवानिवृत्त कर्नल ने कहा कि खंडूरी ने अपने सैन्य जीवन में कड़े अनुशासन के साथ देश सेवा की और हमेशा जवानों के लिए प्रेरणा बने रहे। उनकी कार्यशैली में ईमानदारी और सादगी साफ दिखाई देती थी।


श्रद्धांजलि सभा में मौजूद लोगों ने कहा कि राजनीति में आने के बाद भी खंडूरी ने अपनी सादगी और अनुशासन को कभी नहीं छोड़ा। मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने जनहित और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी।
मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी के निधन को उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है। अंतिम विदाई के दौरान हर कोई उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करता नजर आया।

