

ब्यूरो रिपोर्ट

भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सोमवार को एक ऐतिहासिक मोड़ आया, जब दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता व्यापार, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने वाला माना जा रहा है।


इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के वाणिज्य मंत्री टॉड मैक्ले मौजूद रहे। दोनों नेताओं की उपस्थिति में समझौते को औपचारिक रूप दिया गया।

यह एफटीए 16 मार्च 2025 को शुरू हुई वार्ता के बाद मात्र नौ महीनों में पूरा किया गया, जिसे दोनों देशों के बीच मजबूत भरोसे और रणनीतिक साझेदारी का संकेत माना जा रहा है।


समझौते के तहत भारत को न्यूजीलैंड में अपने सभी टैरिफ उत्पादों पर 100% शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय कपड़ा, परिधान, चमड़ा, सिरेमिक, कालीन और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों के निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
इसके बदले में भारत ने भी न्यूजीलैंड से आने वाले लगभग 95% उत्पादों पर टैरिफ में छूट देने या उसे कम करने का निर्णय लिया है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।

इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर के निवेश का आश्वासन दिया है। यह निवेश विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और औद्योगिक विकास को गति देगा।


हालांकि भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को इस समझौते से बाहर रखा है, जिससे घरेलू किसानों और डेयरी उद्योग के हित सुरक्षित रहेंगे।


एफटीए के तहत शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी बड़े अवसर खुलेंगे। भारतीय छात्रों को अब न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान प्रति सप्ताह 20 घंटे तक काम करने की अनुमति मिलेगी और उन्हें पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा का लाभ भी मिलेगा।
इसके अलावा, कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए 5,000 अस्थायी वर्क वीजा कोटा तय किया गया है, जिससे वे तीन वर्षों तक न्यूजीलैंड में काम कर सकेंगे।
युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम भी शुरू किया गया है, जिसके तहत हर वर्ष 1,000 भारतीय युवा 12 महीने तक न्यूजीलैंड में रहकर काम और यात्रा दोनों कर सकेंगे।
वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर (वस्तुओं में) और 634 करोड़ डॉलर (सेवाओं में) का है, जिसे अगले पांच वर्षों में 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस समझौते को भारत की वैश्विक व्यापार नीति में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जो “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

