चंपावत में गौ सेवा सम्मान अभियान, गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा

चंपावत में गौ सेवा सम्मान अभियान, गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा

स्थान : चंपावत
ब्यूरो रिपोर्ट

चंपावत जिले में सोमवार को गौ सेवा सम्मान अभियान के तहत गौ सेवकों ने व्यापक स्तर पर प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा। इस दौरान लोहाघाट, बाराकोट, चंपावत और पाटी तहसीलों में बड़ी संख्या में गौ सेवक एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।

कार्यक्रम के दौरान गौ सेवकों ने कहा कि गौ माता को हिंदू धर्म में मां का दर्जा प्राप्त है और उसमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसलिए उन्हें राष्ट्रमाता और राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिया जाना चाहिए।

गौ सेवकों ने मांग की कि देश में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और इसके लिए केंद्रीय स्तर पर सख्त कानून बनाया जाए। साथ ही गौ संरक्षण को मजबूत करने के लिए विशेष नीतियां लागू करने की अपील की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में संचालित गौशालाओं को पर्याप्त अनुदान दिया जाए ताकि निराश्रित गौ वंशों की उचित देखभाल हो सके। इसके साथ ही चारे की उचित कीमत तय करने और चारा माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

गौ सेवकों ने गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और इसके संरक्षण के लिए अलग गोचर विकास बोर्ड बनाने की भी मांग उठाई। उनका कहना था कि गोचर भूमि का उपयोग केवल गौशाला और गौ चारण के लिए ही होना चाहिए।

कार्यक्रम में यह भी सुझाव दिया गया कि गौ तस्करी में शामिल अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा दी जाए और तस्करी में उपयोग होने वाले वाहनों को जब्त कर नीलाम किया जाए या गौशालाओं को सौंप दिया जाए।

साथ ही जिला स्तर पर पंचगव्य चिकित्सालय स्थापित करने, स्कूलों के मिड-डे मील में देसी गाय के दूध को शामिल करने और संस्कृत महाविद्यालयों में गौ सेवा को अनिवार्य करने की मांग भी रखी गई।

गौ सेवकों ने राजमार्गों पर गौ दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हर 50 किलोमीटर पर गौ एंबुलेंस और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही हर 150-200 किलोमीटर पर पशु चिकित्सालय स्थापित करने की बात कही गई।

इसके अलावा गौशालाओं को मनरेगा से जोड़कर 100 दिन का रोजगार देने, गौ वंश के अंतिम संस्कार की उचित व्यवस्था करने और इसके लिए सरकारी भूमि उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।

संयुक्त सनातन गौ रक्षा वाहिनी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बताया कि यह अभियान देशभर की लगभग 5000 तहसीलों में चलाया गया है, जहां एक साथ ज्ञापन सौंपे गए हैं।

अंत में गौ सेवकों ने पशुपालकों से अपील की कि वे गौ वंश को निराश्रित न छोड़ें, क्योंकि इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत गंभीर अपराध माना जाता है। अभियान के दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक और भावनात्मक माहौल देखने को मिला।