गन्ना भुगतान को लेकर सख्ती: 14 दिन में भुगतान अनिवार्य, देरी पर 15% ब्याज

गन्ना भुगतान को लेकर सख्ती: 14 दिन में भुगतान अनिवार्य, देरी पर 15% ब्याज

स्थान : बाज़पुर
रिपोर्टर : विशेष शर्मा

देशभर में गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर किसानों की समस्याएं लंबे समय से सामने आती रही हैं। अधिकांश चीनी मिलें समय पर भुगतान नहीं कर पातीं, जिससे किसानों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गन्ना खरीद के बाद बनी चीनी के दाम स्थिर रहने और गन्ने के समर्थन मूल्य में हर साल बढ़ोतरी होने से मिलों की लागत भी बढ़ती जा रही है, जिससे यह समस्या और जटिल हो गई है।

हालांकि कुछ चीनी मिलें एथेनॉल, ऊर्जा और अन्य बाय-प्रोडक्ट्स के उत्पादन से अतिरिक्त आय अर्जित कर समय पर भुगतान करने में सक्षम हैं, लेकिन अधिकांश मिलों में भुगतान में देरी आम बात बनी हुई है। इसी समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने गन्ना कानून में महत्वपूर्ण संशोधन किया है।

संशोधित नियमों के तहत अब चीनी मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर किसानों को भुगतान करना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित समयसीमा में भुगतान नहीं किया जाता है, तो मिलों को 15 प्रतिशत की दर से ब्याज भी किसानों को देना होगा।

उत्तराखंड सरकार में गन्ना राज्य मंत्री मंजीत सिंह राजू ने इस कानून को किसान हित में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

मंत्री ने कहा कि समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान होने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे गन्ने की खेती के प्रति अधिक रुचि दिखाएंगे। इससे गन्ने का रकबा भी बढ़ेगा और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि जो किसान गेहूं की कटाई के बाद गन्ने की बुवाई करना चाहते हैं, उन्हें यदि बीज की समस्या आती है तो वे काशीपुर स्थित गन्ना शोध केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। यदि वहां भी समाधान नहीं मिलता, तो वे सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

सरकार की इस पहल को किसानों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, जिससे गन्ना भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता और समयबद्धता आने की उम्मीद है।