
स्थान – नैनीताल
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़े बहुचर्चित रामपुर तिराहा कांड मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।


सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में दर्ज छह मुकदमों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। अदालत ने यह भी पूछा कि ये मामले किस अदालत में लंबित हैं और उनकी सुनवाई की स्थिति क्या है।


इस पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मुख्य आरोपी रहे तत्कालीन मुजफ्फरनगर जिलाधिकारी अनंत कुमार सिंह से संबंधित मामले की वर्तमान स्थिति का कोई रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध नहीं है।

वहीं याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि मुकदमे दर्ज होने के बाद से अब तक इन मामलों में प्रभावी सुनवाई नहीं हो सकी है। करीब 30 वर्ष बीत जाने के बाद भी इन मामलों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि छह मामलों को जिला जज ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के एक पत्र के आधार पर सुनवाई के लिए मुजफ्फरनगर की अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। इसके बाद से इन मामलों में कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई।
राज्य आंदोलनकारी और अधिवक्ता रमन शाह ने बताया कि इस घटना में सात महिला आंदोलनकारियों के साथ दुष्कर्म किया गया था, जबकि 17 अन्य महिलाओं को प्रताड़ित किया गया था। इस मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी अनंत कुमार सिंह समेत सात आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा मुजफ्फरनगर अदालत में स्थानांतरित किया गया था, जहां अब तक सुनवाई लंबित है।

गौरतलब है कि 2 अक्टूबर 1994 को पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में पुलिस ने रोक दिया था। इस दौरान कथित पुलिस अत्याचार, महिलाओं के साथ दुष्कर्म और फायरिंग की घटनाएं सामने आई थीं, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से मुकदमों की सुनवाई वर्षों से लंबित है। अब सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

