
स्थान -देहरादून

ब्यूरो रिपोट

बजट सत्र की अवधि को लेकर सियासत तेज, गणेश गोदियाल ने सरकार पर प्रश्नों से बचने का आरोप लगाय

एंकर : राज्य में प्रस्तावित बजट सत्र की अवधि को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। गणेश गोदियाल ने सत्र की समयावधि पर सवाल उठाते हुए कहा कि चार-पांच दिन का समय सत्तर विधानसभा क्षेत्रों के मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि जब तक बजट पेश नहीं हो जाता और उसका अभिभाषण सामने नहीं आता, तब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि सरकार प्रदेश के लिए क्या दिशा तय करने जा रही है, लेकिन सीमित अवधि में व्यापक चर्चा संभव नहीं है।


गोदियाल ने कहा कि प्रदेश के विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और जनहित के सवालों को लेकर विधानसभा में जाते हैं, इस उम्मीद के साथ कि उन्हें ठोस जवाब मिलेगा। हालांकि, उनका आरोप है कि सत्र की कम अवधि के कारण अधिकांश सवालों पर संतोषजनक चर्चा नहीं हो पाती और जनप्रतिनिधि मायूस होकर लौटते हैं। उन्होंने मांग की कि बजट सत्र कम से कम 20 से 25 दिन, बल्कि संभव हो तो एक महीने तक चलाया जाना चाहिए ताकि सभी विभागों से जुड़े प्रश्नों पर विस्तार से जवाब मिल सके।

उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों में वह निर्धारित प्रश्नकाल से बचते रहे हैं। विशेष रूप से सोमवार को मुख्यमंत्री के विभागों से जुड़े प्रश्नों के लिए तय दिन का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों में ऐसा अवसर कभी नहीं आया जब मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर उन सवालों का जवाब दिया हो। इस बार भी सोमवार का दिन राज्यपाल के अभिभाषण के लिए तय किए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई और इसे प्रश्नों से बचने की रणनीति बताया।


गोदियाल का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार को सवालों से भागने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बजट सत्र को लंबा किया जाए ताकि आने वाले सोमवारों में मुख्यमंत्री के विभागों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।


