चंपावत के नगरूघाट में बरसों बाद सिंचाई गूल की मरम्मत का आश्वासन, ग्रामीणों की खेतीबाड़ी फिर से शुरू होगी

चंपावत के नगरूघाट में बरसों बाद सिंचाई गूल की मरम्मत का आश्वासन, ग्रामीणों की खेतीबाड़ी फिर से शुरू होगी

स्थान – चंपावत

ब्यूरो रिपोर्ट

जिले के लोहाघाट ब्लॉक के सीमांत पासम ग्राम सभा के नगरूघाट में बरसों से क्षतिग्रस्त गूल (सिंचाई जलाशय) की मरम्मत न होने के कारण सिंचाई के लिए पानी की कमी से ग्रामीण खेती करने में असमर्थ थे और उनके खेत पूरी तरह बंजर हो गए थे।

नगरूघाट के ग्रामीण मुख्य रूप से अपने खेतों में गेहूं, धान, मड़वा, गहत, सब्जी उगाते हैं और पशुपालन सहित अन्य कृषि गतिविधियों से अपनी आजीविका चलाते हैं।

पिछले 4 वर्षों से लघु सिंचाई विभाग द्वारा गूल की मरम्मत नहीं होने के कारण जल की उपलब्धता न होने से ग्रामीण नई फसल नहीं उगा पा रहे थे।

ग्रामीणों और पासम ग्राम प्रधान चंद्रकांत तिवारी ने इस समस्या को जिलाधिकारी मनीष कुमार के समक्ष रखा। ग्राम प्रधान ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी को विस्तार से बताया कि नगरूघाट की खेतीबाड़ी पूरी तरह प्रभावित हुई है और ग्रामीणों की आजीविका संकट में है।

जिलाधिकारी चंपावत मनीष कुमार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों को तत्काल स्थल निरीक्षण के लिए निर्देशित किया।

इसके बाद लघु सिंचाई विभाग की टीम नगरूघाट पहुंची और गूल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि गूल की मरम्मत जल्द ही की जाएगी।

ग्राम प्रधान चंद्रकांत तिवारी ने कहा कि जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देश और त्वरित कार्रवाई से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि जैसे ही गूल की मरम्मत हो जाएगी और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा, बरसों से वीरान पड़े खेतों में एक बार फिर फसल लहलहाने लगेगी और ग्रामीण अपनी आजीविका से जुड़ सकेंगे।

नगरूघाट के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस कार्रवाई से ग्रामीणों में खेतीबाड़ी को लेकर नया उत्साह पैदा हुआ है और उनका जीवन फिर से कृषि पर आधारित हो सकेगा।

यह पहल राज्य सरकार की उन योजनाओं का प्रतीक है जो सीमांत और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए संचालित की जा रही हैं।