
स्थान – देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर वायरल हुए ऑडियो और वीडियो ने उत्तराखंड में राजनीतिक भूचाल मचा दिया है। वायरल सामग्री में पूर्व पार्टी विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर के नाम सामने आने के बाद प्रदेश प्रभारी भाजपा नेता दुष्यंत गौतम ने उर्मिला सनावर समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।


इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने उर्मिला सनावर को ढूंढने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन कई दिनों तक उन्हें ढूंढने में सफलता नहीं मिली।

हालांकि, अब यह मामला और भी चर्चा में आ गया है, क्योंकि भाजपा के कार्यकर्ता डीएस रावत और दर्शन भारती ने उर्मिला सनावर को खोज निकाला और पुलिस के समक्ष पेश होने के लिए कहा।

इस घटना के बाद सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इसे प्रशासन की असफलता माना जाए या इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा के तहत देखा जाना चाहिए।

डीएस रावत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने और दर्शन भारती ने उर्मिला सनावर से संपर्क किया और उन्हें पुलिस के समक्ष पेश होने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें उर्मिला सनावर के छिपने की जगह कैसे पता चली।

इस मामले ने राज्य में राजनीतिक दलों के बीच भी हलचल मचा दी है। विपक्ष ने इसे प्रशासनिक विफलता बताया है, जबकि भाजपा खेमे ने इसे पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता के सहयोग का परिणाम करार दिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुकदमे और जांच प्रक्रियाओं के तहत उर्मिला सनावर से पूछताछ की जाएगी और सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वायरल ऑडियो और वीडियो की जांच की जा रही है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकरण ने राज्य में सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए चुनौती पेश की है। प्रशासनिक कार्यवाही, पार्टी सक्रियता और राजनीतिक संदेशों के बीच जनता की नजर अब पुलिस की निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया पर बनी हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तराखंड में हाई-प्रोफाइल मामलों में प्रशासन, राजनीतिक दल और पार्टी कार्यकर्ता तीनों की भूमिकाओं पर सवाल उठते रहते हैं। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि पुलिस पूछताछ और जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए और मामले के सभी तथ्य सार्वजनिक हों।

