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रिपोर्टर- अज़हर मलिक

स्थान- काशीपुर


उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गृह जनपद में ही सरकारी खजाने के रखवाले कैसे सरकारी खजाने को लूटने में लगे हैं, ग्राम प्रधानों की सांठगांठ और अधिकारियों की दया दृष्टि से ग्राम प्रधान कैसे पुराने कार्यों को नया दिखाकर, विकास योजनाओं के नाम पर बिल पास करा कर सरकारी खजाने में लूट मार रहे हैं और अधिकारी जांच के नाम पर सिर्फ टालमटोल करते हुए दिखाई दे रहे हैं ऐसा हम नहीं ऐसा ग्रामीणों का कहना है , केसे सरकारी खजाने में लूटमार चल रही है देखे हमारी एक स्पेशल रिपोर्ट


उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भले ही प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का सपना देखते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के गृह जनपद उधम सिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में जिम्मेदार अधिकारियों से मिलकर भ्रष्टाचार का ऐसा खेल खेला जा रहा है जो सरकारी खजाने को दीमक जैसे खोकला करने में लगे हैं। मामला काशीपुर के ग्राम पंचायत शिवलालपुर अमर झंडा का है, जहां पानी वाले पंपों को एक बार पूर्व प्रधान द्वारा लगवा कर बिल पास करा लिया जाता है फिर दोबारा वर्तमान प्रधान द्वारा उन्हीं कार्यों को अपने कार्यकाल में दिखाकर दोबारा उन्हीं सरकारी हैंडपंपों का बिल पास करा लिया जाता है, मामले का खुलासा सूचना के अधिकार अधिनियम से हुआ। जहां ग्रामीणों का आरोप है। कि जिम्मेदार अधिकारियों के साथ साठगांठ कर वर्तमान प्रधान अंकुर कुमार ने पूर्व प्रधान सरीना बेगम के द्वारा वर्ष 2016 से 2017 में जो पानी के हेड पंप जो लगवाए थे। उनको अपने वर्तमान कार्य में दिखाकर उन सरकारी पंपों के बिल पास करा कर लाखों रुपए का गमन किया है, इतना ही नहीं कुछ हेडपंप कागजों में तो सही से लगे हुए है। ग्रामीण क्षेत्र की जनता उस हेडपंप के पानी का भरपूर उपयोग भी कर रही है, लेकिन धरातल पर तस्वीरें कुछ और ही बयां करती हुई दिखाई दे रही है। कुछ नहीं चलने की स्थिति में नहीं तो कुछ है हेडपंप पानी पीने लायक नहीं तो कहीं हेड पंप आधा अधूरा लगा है, जिसक शिकायतों के बाद भी अधिकारी कार्रवाई के नाम पर टालमटोल करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

जिनके कंधों पर सरकार ने सरकारी खजाने की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी है। उन अधिकारियों का क्या कुछ कहना है आप भी जरा ध्यान से सुनिए अब तक कार्यवाही क्यों नहीं की, क्योंकि साहब का कहना है कभी शिकायत करता नहीं मिलते तो कभी ग्राम प्रधान, क्योंकि जिम्मेदार साहब नहीं जानते कार्यवाही करने के लिए कलम चलाई जाती है मुलाकात नहीं की जाती खेर सहायक विकास अधिकारी जगदीश सिंह राणा के बयान उसे आप अंदाजा लगा लीजिए कि वर्तमान प्रधान पर किस तरीके से मेहरबान होकर बैठे हैं।


सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी तंत्रों के कंधों पर जिम्मेदारी क्यों ना दे रखी हो लेकिन सरकारी अधिकारी सरकारी खजाने को जमकर लुटाते हुए दिखाई दे रहे हैं, ऐसे में बड़ा सवाल उठता है आखिर ऐसे कब तक अधिकारी भ्रष्टाचार की जड़ों को मजबूत करते रहेंगे, और ऐसे लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ धामी की पावरफुल एक्शन होता है। या नहीं या फिर यूं ही अधिकारियों पर कार्रवाई के नाम पर जांच और मंचो से भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश की घोषणाएं होती रहेंगी।



